गर्भधारण की प्रक्रिया को समझने के लिए जननांगों की जानकारी होना आवश्यक है।

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महिला के मस्तिष्क में कुछ हार्मोन बनते हैं, यह हार्मोन अंडकोष, ओवरी पर असर करते हैं जिसके कारण से 6-8 अंडे, फोलीकल बनना शुरू होते हैं। इनमें से कोई एक अंडा 18 से 20 मिलीमीटर तक बड़ा होता है। 

हार्मोनों के प्रभाव से यह अंडा स्वतः फूट जाता है और इसके अंदर मौजूद डिंब ट्यूब में पहुंचता है, बिंब के निकलने के बाद बचा हुआ अंडा 'पी' नाम का एक नया हार्मोन बनाना शुरू करता है। अगर ट्यूब में डिंब, शुक्राणु से मिलकर भ्रूण बना लेता है, जो विकसित होकर बच्चे का रूप लेगा तो माहवारी नहीं आती, पर अगर किसी कारण भ्रूण नहीं बना तो 'पी' नामक हार्मोन 14 दिन के बाद माहवारी ले आता है।

पुरुष में शुक्राणु की मात्रा और क्षमता ठीक हो तो कई लाख शुक्राणु में मौजूद डिम्ब तक पहुंचते हैं इनमें से कोई एक डिम्ब के अंदर प्रवेश कर भ्रूण बनाता है। यह भ्रूण, जो बच्चे की पहली कोशिका है, कुछ समय बाद ट्यूब से गर्भाशय तक पहुंच जाता है, वह गर्भाशय की दीवार से चिपकने पर यह एचसीजी नामक हार्मोन बनाता है जो माहवारी रोक देता है और इसी हार्मोन को हम पेशाब की जांच में पहचान पाते हैं।

ऐसे सुनने और बताने में गर्भधारण की प्रक्रिया बहुत सरल लगती है, परन्तु वास्तविकता में असंख्य हार्मोन्स छोटे-छोटे अनगिनत चरणों में एक साथ मिलकर इसको अंजाम देते हैं। किसी भी चरण में थोड़ी सा भी फेरबदल गर्भधारण में अवरोधक बन जाता है। अधिकतर मरीजों में डॉक्टर चार बड़ी बाधाओं को ढूंढने का प्रयास करते हैं। वह अंग जिसमें यह बाधाएं हो सकती हैं: 

1. अंडकोष: ओवरी,

2. नली: ट्यूब,

3. गर्भाशय: यूट्रस,

4. शुक्राणु: स्पर्म,

इन समस्याओं की जांच वीर्य परीक्षण, सोनोग्राफी, एक्स-रे या दूरबीन की जांच द्वारा की जाती है। कभी-कभी यह मुमकिन है कि प्राथमिक सभी जांचों में कोई कमी दिखाई ना दे,

ऐसी परिस्थितियों में यह माना जाता है कि कमी इतनी सूक्ष्म रूप में है कि वह प्राथमिक जांच में नहीं दिख रही है। सामान्यतः जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो वह आपसे आपकी उम्र, माहवारी के बारे में, कब से गर्भधारण का प्रयास कर रहे हैं, इत्यादि पूछेगा। 

यह आपकी गर्भधारण कर पाने की आंतरिक क्षमता को आंकने में मदद करता है। साधारणतः 80 महिलाएं प्रयास के 3 वर्ष के भीतर गर्भवती हो जाती हैं। गर्भधारण कर पाने की क्षमता का कोई सटीक मापदंड या परीक्षण नहीं है, परन्तु यह बढ़ती उम्र, ज्यादा वजन, लंबी संतानहीनता तथा अन्य बीमारियों से कम हो सकती है।

अगर आपकी जांचों में कोई स्पष्ट रूप से कमी आती है तो डॉक्टर उस कमी को ध्यान में रखकर इलाज कर सकते हैं। परन्तु जैसे कि पहले बताया गया कभी-कभी कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आता है, ऐसी परिस्थितियों में डॉक्टर अलग-अलग इलाज जैसे गोली, इंजेक्शन या टेस्ट ट्यूब बेबी की सलाह दे सकते हैं।

अंतत: गर्भधारण करने की प्रक्रिया या इलाज एक लंबा सफर है जिसे हर संतानहीन दंपति को तय करना पड़ सकता है। यह रास्ता कुछ के लिए छोटा तो कुछ के लिए बहुत लंबा होता है। कई लोगों को अंततः बच्चे की प्राप्ति हो जाती है, जबकि कुछ सभी प्रकार के इलाज के बाद भी संतानहीन रह जाते हैं। 

इस इलाज में हर सवाल या दुविधा का हल मिले ऐसा जरूरी तो नहीं, पर उम्मीद पर दुनिया टिकी है। जब कोशिश करने पर ईश्वर मिल सकते हैं तो बच्चा क्यों नहीं?