पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को कांग्रेस ने देशव्यापी आंदोलनों की समिति का प्रमुख बनाया है. इन आंदोलनों को धार देने की जिम्मेदारी उनकी है, लेकिन उनके सियासी एजेंडे में इन दिनों सबसे ऊपर खजुराहो संसदीय क्षेत्र का पन्ना जिला है। यही कारण है कि सियासी गलियारों में एक ही सवाल उठ रहा है कि राष्ट्रीय आंदोलनों की जिम्मेदारी संभालने वाले सिंह के एजेंडे में आखिर सबसे ऊपर पन्ना क्यों  दिग्विजय सिंह ने बड़ा मुददा बनाने की कोशिश की है. रेत खनन को लेकर वे लोकायुक्त गए हैं, तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी पत्र लिखे हैं.

दिग्विजय सिंह का आरोप है कि रेत खनन भाजपा नेताओं के संरक्षण में चल रहा है तो वही मुड़िया पहाड़ पर भाजपा से जुड़े अंकुर त्रिवेदी ने कब्जा कर रखा हैं. मुड़िया पहाड़ के मामले में मुख्यमंत्री चौहान ने जिला प्रशासन से जांच कराई है. इस मामले में जांच प्रतिवेदन तैयार कर सरकार को भेजा गया है, इसमें इस बात का उल्लेख है कि आदिवासी हीरालाल और अंकुर त्रिवेदी के बीच जमीन की खरीदी बिक्री का सौदा हुआ और त्रिवेदी की ओर से राशि का भुगतान भी हीरालाल को किया, जिसक है.

चर्चा इस बात की भी है कि पन्ना जिले में दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में सरकारी जमीन उनके कुछ प्रभावशाली करीबी लोगों को दी गई थी. इसमें 20 हेक्टेयर से अधिक जमीन तो पड़रिया कला में ही दिग्विजय सिंह के करीबियों के नाम पर है. पन्ना मुख्यालय में कांग्रेस की पूर्व जिला अध्यक्ष दिव्या रानी सिंह को फलों की खेती के लिए दी गई जमीन हाल ही में प्रशासन ने कब्जा मुक्त कराई है. दिव्या रानी पर गलत जानकारी देने पर उच्च न्यायालय जबलपुर ने जुमार्ना भी लगाया है. उधर, केन नदी के किनारे एक जमीन कथित तौर पर दिग्विजय सिंह के दामाद ने खरीदी है. इस पर जिला प्रशासन की नजर टेढ़ी है. परिणाम स्वरूप दिग्विजय सिंह के एजेंडे में पन्ना सबसे ऊपर आ गया है.

दिव्या रानी ने लगाई थी कमलनाथ से गुहार

नेशनल पार्क प्रबंधन द्वारा बफर जोन में हो रहे अवैध निर्माण पर प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीमती दिव्या रानी सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को एक पत्र लिखा था. इस पत्र के माध्यम से  जिला कांग्रेस अध्यक्ष  श्रीमती सिंह ने  तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को अवगत कराया था कि भाजपा मानसिकता के अफसरों ने गलत ढंग से उनके खिलाफ अवैध कब्जे का प्रकरण दर्ज किया है. नाथ ने कांग्रेस अध्यक्षा के पत्र को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन अपर मुख्य सचिव वन एपी श्रीवास्तव को फिर से जांच कराने के लिए निर्देशित किया. मुख्यमंत्री के निर्देश पर दूसरी बार जांच कराई गई. दूसरी मर्तबा जांच में भी दिव्या रानी द्वारा काबिज भूमि वनखंड का हिस्सा पाया गया.          

किसके कब्जे में कितनी वन भूमि

दिव्या रानी सिंह-0.400 हेक्टर
केशव प्रताप सिंह- 0.400 हे.
अनंत विजय सिंह-2.000.हे.
बिन्नी राजा-2.50 एकड़
प्रशांत सिंह 4.50 एकड़
मनोज सिंह - 2.50 एकड़
देवेंद्र खरे - 5.00 एकड़