चुनाव आयोग के पांच राज्यों की चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही इस बार चुनाव आयोग भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव की ओर बढ़ता नजर आ रहा हैं, क्योंकि चुनाव आयोग इस बार बाहुबली उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारने से पहले उनकी पुरानी अपराधिक हिस्ट्री पर काम कर रहा है। साथ ही उन्हें मैदान में उतारकर उनके रसूख का फायदा उठाने वाली राजनीतिक पार्टियों पर भी चुनाव आयोग कड़े कदम उठाने के लिए तैयार नज़र आ रहा हैं।

बाहुबलियों पर सख्त होता चुनाव आयोग :

देश में जब भी चुनावी बिगुल बजता है तो कई बाहुबली नेता अपने खौफ और रसूख का इस्तेमाल कर चुनावी मैदान में उतर जाते है, ओर राजनीतिक दल भी उन्हें अपने फायदे के लिए टिकट दे देते है। लेकिन उसका ख़ामियाजा देश की जनता को ही भुगतना पड़ता है, क्योंकि यह बाहुबली नेता राजनीति में आने के बाद खुलेआम अवैध रूप से काम करते है, ओर सरकार भी फिर इनका कुछ नही बिगाड़ पाती हैं। 

1. चुनाव आयोग भी अब इन सब चीजों को लेकर एक्शन में नज़र आ रहा है, चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही चुनाव आयोग ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात को बड़ी गंभीरता से उठाते हुए कहा कि, अब राजनीतिक दलों को या बाहुबली नेताओं को चुनावी मैदान में उतरने से पहले अपने आपराधिक मामलों की जानकारी चुनाव से पहले ही चुनाव आयोग, समाचार पत्र, न्यूज चैनल और साथ ही पार्टी के ऑफिसियल पेज पर अपलोड करनी होगी। इसके बाद उसे आयोग को यह बताना होगा कि वह चुनाव में क्यों उतरना चाहता हैं। 

2.  बाहुबलियों को टिकट देने से पहले पार्टी को भी यह बताना होगा कि वह इन्हें क्यों चुनाव में उतारना चाहती हैं। 

भारतीय राजनीति में पहली बार रैलियों पर लगी रोक :

पांच राज्यों में चुनावी ऐलान के साथ भारतीय राजनीति में यह पहला चुनाव होने जा रहा है, जिसमें रैलियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही सरकार ने सिर्फ़ पांच लोगों को भी डोर टू डोर कैंपेन की अनुमति दी हैं।