भोपाल,
जंगलों में बार-बार लगाई जाने वाली आग से वन्यप्राणी, जीव-जंतुओं की बेहरमी से मौतें हो रही हैं। मरने वालों में छोटे जीव-जंतु, वन्यप्राणी अधिक है। शासन के पास नुकसान का कोई आकलन नहीं है। दूसरी गेहूं की कटाई के बाद खेतों को आग के हवाले किया जा रहा है। जंगल और खेतों में आग की इन घटनाओं पर शासन की चुप्पी है। गाहे बगाहे खानापूर्ति के लिए इक्का दुक्का मामलों में कार्रवाई की जा रही है। विशेषज्ञों ने आग की इन घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है कहा है कि इस तरह आग पर काबू नहीं पाया गया तो इंसानों पर प्रकृति के हमले तेज हो जाएंगे और आने वाले पीढ़यिों को इसके परिणाम भुगतने होंगे ।
- अब आग के हवाले किए जा रहे खेत
- किसानों की हठधर्मिता का नतीजा है खेतो में आग की घटनाएं
- विशेषज्ञों ने कहा- इस तरह तो इंसानों पर तेज हो जाएंगे प्रकृति के हमले
- आग से ऐसे प्रभावित हो रहा प्रदेश का जंगल
वन विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019 में 14 हजार 2020 में 6 हजार और 2021 में 23 हजार हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हुआ। इसके पूर्व और इसके बाद के आंकड़े वन विभाग देने से पल्ला झाड़ है। वे आंकड़े केवल वन विभाग के हैं जो प्रभावित जंगल के क्षेत्रफल का एक अंश हो सकते हैं। आग ने हजारों हेक्टेयर जंगल को अपनी चपेट में लिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आग लगाने की वजह महुआ फूल को एकत्रित करने के लिए पेड़ों की सफाई के लिए आग लगाना, आपसी झगड़े में एक दूसरे को फंसाने के लिए आग लगाना, वन विभाग की कार्रवाई का बदला लेने के लिए आग लगाना गांव व अपने आसपास की वन जमीन को हड़पने के लिए आग लगाना मुख्य है।
वन विभाग के पास वन अमले की कमी के कारण पूरे जंगल पर नजर रखना चुनौती है। यदि पर्यावरण हितैषी आग लगने की सूचना देते भी हैं भी आग पर काबू पाने में देरी हो जाती है या फिर ध्यान ही नहीं दिया जाता है। जिसकी वजह से आग का रूप ले रही है। आग की घटनाओं से होने वाले नुकसान को वैज्ञानिक ढंग से ग्रामीणों के सामने नहीं रखा जा रहा है। वन समितियों को निष्क्रिय बनाकर रखा है इसलिए कोई काम नहीं हो रहे है। जिसकी से जंगल बर्बाद हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जो कभी जंगल नहीं गए हैं उनके लिए भी जंगल सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है ऐसे जंगल को आग के हवाले किया जा रहा है। ओपी के लिए भी जरूरी है।
इधर खेतों में जैसे-जैसे गेहूं की कटाई पूरी हो रही है वैसे-वैसे नरवाई में आग लगाने की घटनाएं बढ़ रही है। इसका एकजाई रिकार्ड सरकार के पास नहीं है और न ही रिकार्ड तैयार करने की कोई जहमत उठाई है। इस तरह आग की घटनाएं बढ़ रही है। कुछ गिने-चुने मामलों में जिला प्रशासन आग लगाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में आग के मामलों पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है। खेतों में बार-बार लगाई जा हरी आग से मुद्धा की सेहत पर असर पड़ रहा है। खेतों में उपजाऊ तत्व खत्म हो रहे हैं। छोटे जीवों के घनत्व कम हुआ है।