आखिरकार रुपया 80 के पार हो गया। अब अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 80.02 रुपये के बराबर हो गई। डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर पर है। आशंका जताई जा रही ही कि आगे स्थिति और भी बदतर हो सकती है।
देश के चिंता की बात यह भी है कि भारत का व्यापार घाटा भी लगातार बाद रहा है। जून 2022 में यह घाटा 2 लाख करोड़ को पार कर चुका है। साल की तीसरी तिमाही में डॉलर के 82 रुपए तक गिरने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने भी गिरावट आई है। ऐसे में भारत में भी आर्थिक मंदी की आहट से चिंता दिखाई देने लगी है।
रुपये की कमजोरी का सबसे ज्यादा असर महंगाई पर पड़ता है। इसकी वजह यह है कि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ज्यादा कीमत पर कच्चा तेल खरीदने का मतलब है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमत में उछाल आएगा। इसका असर हर तरह के सामान की कीमत पर पड़ेगा।
दूसरी ओर रुपए की गिरती कीमत के कारण विपक्ष हमलावर हो गया है। साल 2014 में रुपये की गिरती कीमत को लेकर यूपीए की मनमोहन सरकार को जमकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। तब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर तीखे हमले किये करते थे।