भोपाल,
कई बार खर्राटे के कारण व्यक्ति को नींद न आने की समस्या हो जाती है, लेकिन लोग इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। एम्स भोपाल में एक ऐसे व्यक्ति की सर्जरी की गई जो पिछले 34 सालों से खर्राटों के कारण सो नहीं पा रहा था। डॉक्टरों ने उसके जबड़े का ऑपरेशन कर इस समस्या से मुक्ति दिलाई है।
आखिरकार 34 सालों के खर्राटों से बाहर आया युवक
एम्स के डॉक्टरों ने जन्मजात विकार से दिलाई मुक्ति
भोपाल के कटारा हिल्स में रहने वाले 34 साल के युवक को लगभग बचपन से ही नींद में सांस अटकने और खर्राटे लेने की बीमारी थी। कई डॉक्टरों को दिखाने के बाद जब समस्या ठीक नहीं हुई तो युवक ने एम्स की स्लीप स्टडी लैब में दिखाया। यहां जांच के बाद पता चला कि युवक के निचले जबड़े में जन्मजात विकार है। इसके बाद एम्स डॉक्टरों ने जांच करने के बाद उसके जबड़े की सर्जरी की और उसकी समस्या का दूर किया।
जबड़े के कारण दबी दिखी श्वांस नली एम्स के मैग्लेफैशियल सर्जन डॉ. अंशुल
राय ने बताया कि मरीज की स्लीप स्टडी की गई, जिसमें गंभीर एपनिया-हाइपनिया पाया गया। इलाज के लिए मरीज को स्लीपिंग डिवाइस लगाई गई, लेकिन इससे भी मरीज को कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद मरीज का सेफैलोमेट्रिक टेस्ट किया गया जिसमें रोगी का निचला जबड़ा विकृत पाया गया। डॉ. राय ने बताया कि मरीज का निचला जबड़ा छोटा और पीछे की तरफ खिसका हुआ था। इससे मरीज का एयर वे यानि सांस की नली दब रही थी।
एम्स में पहली बार सर्जरी
ऑर्थोगनेथिक सर्जरी कर किया फिट
चिकित्सकीय भाषा में इसे मेडिकल के बाइलेटरल सैजिटल स्प्लिट ओस्टियो टॉमी कहा जाता है। ऑपरेशन के कुछ दिन बाद जब मरीज का स्लीप एपनिया टेस्ट किया गया तो स्कोर 70 फीसदी तक कम पाया गया।