भोपाल: पन्ना और छतरपुर के बाद फंदा बनाकर वन्य प्राणियों का शिकार करने वाले शिकारी अब कान्हा में एक्टिव हो गए हैं। कान्हा टायगर रिजर्व के अंतर्गत परिक्षेत्र भैसानघाट के बीट पोंगापानी में 6 जनवरी 23 को शिकारियों के बनाए क्लच वायर से फंदे में फंस कर एक बाघिन घायल हो गई थी।

गौरतलब पहलू यह है कि घायल बाघिन को ढूंढने के लिए कान्हा के फ्रंट लाइन वर्करों को 1 महीने तक कड़ी मशक्कत करनी पढ़ी थी। आखिरकार 5 फरवरी को रेस्क्यू करने में सफलता मिल गई। बाघिन की उपचार कर उसकी जान बचा ली। कान्हा के पार्क संचालक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि बाघिन (टी-9) जिसकी उम्र लगभग 12-13 वर्ष है। क्लच वायर का फंदा लगने के कारण घायल बाघिन को 6 जनवरी 23 को प्रथम देखा गया था।

इसके रेस्क्यू हेतु परिक्षेत्र भैसानघाट, मुक्की एवं गढ़ी के वनक्षेत्रों में तभी से लगातार प्रयास किया जा रहा था। रेस्क्यू ऑपरेशन के लिये तीन विभागीय हाथी एवं 50-60 वयक्तियों का दल लगाया गया था। बाघिन के लगातार मूवमेंट होने से उसकी निश्चित उपस्थिति नहीं मिल पा रही थी। लगभग 5000 हेक्ट. क्षेत्र में इसका विचरण था।

कैमरा ट्रैप से लोकेशन मिली-

2 फरवरी 23 को बीट पांगापानी में पिंजरा लगा कर रेस्क्यू का प्रयास किया गया। आखिरकार 5 फरवरी 23 को बाघिन (टी-9) पकड़ी गयी। मौके पर बाघिन को बेहोशकर तार का फंदा काटा गया एवं गले के घाव को सफाई कर दवाई लगाई गयी। बाघिन को आगे भी उपचार की आवश्यकता को देखते हुये मुक्की रेस्क्यू सेंटर में स्थानांतरित किया गया है।

इसे घांव के ठीक होने तक रखा जायेगा। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान डॉ. संदीप अग्रवाल, वन्यप्राणी चिकित्सक, संजय रायखेड़े, सहायक संचालक (हलोन), कैलाश बामनिया, परिक्षेत्र अधिकारी, भैसानघाट एवं अन्य क्षेत्रीय अमला भी उपस्थित रहा।