भोपाल। राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग को तीन साल बाद अपनी गलती का एहसास हुआ और अब उसने आबकारी कार्यालय के लीगल मैटर्स विधिमान्य करने के लिये राजस्व मंडल ग्वालियर को चीफ रेवेन्यु अथारिटी घोषित कर दिया है।
दरअसल भू-राजस्व संहिता में आबकारी आयुक्त के राजस्व वसूली संबंधी आदेशों के विरुध्द अपील करने के लिये राजस्व मंडल को चीफ रेवेन्यु अथारिटी बनाया गया था। परन्तु वर्ष 2018 में भू-राजस्व संहिता में संशोधन हो गया जिसमें राजस्व मंडल को चीफ रेवेन्यु अथारिटी बनाने का उपबंध हट गया था। लेकिन इसके बावजूद भी आबकारी आयुक्त के आदेशों के विरुध्द राजस्व मंडल में अपीले दायर हो रही थीं और सुनवाई की जा रही थी।
यह कार्यवाही विधिमान्य रहे, इसके लिये तीन साल बाद अब वाणिज्यिक कर विभाग ने मप्र आबकारी अधिनियम 1915 के तहत राजस्व मंडल को नये सिरे से चीफ रेवेन्यु अथारिटी घोषित कर दिया है तथा इस प्रावधान को भूतलक्षी प्रभाव से यानि 27 जुलाई 2018 से प्रभावशील किया गया है।