आमतौर पर हम मच्छरों को मारने के लिए या तो मॉस्किटो रिपेलेंट अगरबत्ती का इस्तेमाल करते हैं, या फिर हम इन मच्छरों को मारने के लिए मॉस्किटो रिपेलेंट लिक्विड या फिर तरह-तरह के स्प्रे  का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन डॉक्टर्स का कहना है, कि लंबे समय तक इन सभी साधनों का उपयोग मच्छर भगाने के लिए करना स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक हो सकता है।  

अहमदाबाद शहर में मानसून के मौसम में पानी और मच्छर जनित बीमारियां बढ़ रही हैं। तो वहीं दूसरी ओर डायरिया-उल्टी, डेंगू और मलेरिया के मरीजों की संख्या में चिंताजनक इजाफा हो रहा है। यही नहीं लोग यहां पर मच्छरों को भगाने के लिए तरह-तरह के स्प्रे का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो उनकी सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। 

नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भाविन सोलंकी मच्छरों को भगाने के लिए स्प्रे, अगरबत्ती या तरल पदार्थ का उपयोग करने से पहले सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। उन्होंने कहा कि मच्छर मारने वाली मशीनों में मच्छरों को मारने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला लिक्विड स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। ऐसे स्प्रे आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्प्रे में मौजूद रसायन से सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए ऐसे केमिकल स्प्रे के इस्तेमाल से बचना चाहिए और इनकी जगह मच्छरों को भगाने के लिए रैकेट का इस्तेमाल करना चाहिए।। 

6 दिन में मलेरिया के 48 मामले आए सामने-

वर्तमान में बारिश के चलते मच्छर जनित और जल जनित बीमारियों ने जोर पकड़ लिया है, रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 6 दिनों में इस इलाके से मलेरिया के 48 मामले सामने आए हैं। शहर में अगस्त के पहले 8 दिनों में ही डेंगू के 41, मलेरिया के 48, डायरिया-उल्टी के 312, पीलिया के 71, टाइफाइड के 102 और चिकनगुनिया के 3 मामले सामने आए हैं। 

इस तरह से अहमदाबाद के लोगों के लिए बारिश के मौसम में पैदा हुए मच्छर लोगों की मुसीबतों का कारण बन गए हैं, वहीं मच्छर नाशक दवाओं के इस्तेमाल से भी दूसरी तरह की बीमारियां पैदा हो रही हैं, इन सभी से बचने के लिए सावधानी रखना ज़रूरी है, साथ ही ये भी ज़रूरी हो जाता है, कि मच्छर नाशक  दवाओं के स्थान पर विकल्प के रूप में रैकेट या ऐसे ही किसी साधन का इस्तेमाल कर मच्छरों को भगाया जाए।