MP Politics: मध्यप्रदेश की सियासत में AIMIM के एक पत्र से बवाल शुरू हो गया है. हाल ही में AIMIM नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को बकरीद के लिए एक ऐसा पत्र लिखा, जिसके ज़रिये बीजेपी अब कांग्रेस से तीखे सवाल पूछ रहीं हैं.

दरअसल, दिग्विजय सिंह को ये पत्र AIMIM नेता तौकीर निजामी ने लिखा है. जिसके ज़रिये AIMIM नेता ने मांग की है कि कांग्रेस पार्टी यदि सच में धर्मनिरपेक्ष पार्टी है तो फिर पीसीसी में बकरीद मनाने और बकरे की कुर्बानी व विशेष नमाज अदा करने की इजाजत दें.

AIMIM के पत्र से शुरू हुआ बवाल-

अब ये पत्र बकरीद से ठीक एक दिन पहले सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इस मुद्दे पर बीजेपी नेताओं ने तो कांग्रेस को घेरना तक शुरू कर दिया है. ऐसे में कांग्रेस के लिए ये समय काफी मुश्किलों भरा है क्योंकि उनके एक बयान से ना सिर्फ मुस्लिम बल्कि हिन्दू वोट बैंक पर भी बुरा असर पड़ सकता हैं.

दिग्विजय सिंह को घेरते हुए गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, यह तो होना ही था चाचा जान. जिंदगी भर आप हिंदू और हिंदुत्व का हलाला करते रहे. अब आपसे बकरे की हलाली के लिए डिमांड आ गई. आप सर्वधर्म का जो चोला ओढ़े हुए हैं और इसको ओढ़कर आप हिंदू और हिंदुत्व को नकारते हैं. यह तो आपके साथ दिग्विजय सिंह जी होना ही था.

वहीं, प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने लिखा, मध्य प्रदेश कांग्रेस की मोहब्बत की दुकान में AIMIM नेता ने बकरे की कुर्बानी व विशेष नमाज की इजाजत मांगी? उन्होंने पत्र में लिखा है कि जब मुस्लिम समाज के वोट पूरे 100% चाहिए, खुद को धर्मनिरपेक्ष बताते हो तो फिर विशेष नमाज और बकरे की कुर्बानी की इजाजत क्यों नहीं?

नरेंद्र सलूजा ने आगे लिखा, बात तो सही लिखी है. बकरा भी किया तैयार. अब देखना होगा कमलनाथ जी की पीसीसी में कब बकरे की कुर्बानी होती है और कब विशेष नमाज अदा होगी? भाजपा तो पहले से ही कह रही है कि जिस दिन से पीसीसी में हनुमान चालीसा का पाठ हुआ है, भगवे रंग से पीसीसी को सजाया गया था ,उस दिन से ही कई अल्पसंख्यक समाज के नेता नाराजगी दिखाकर विरोध कर रहे है.

उन्होंने आगे कहा, कुछ अल्पसंख्यक नेताओं ने तो  पीसीसी को हरे रंग से सजाने की चेतावनी भी दी थी, जिससे डरकर कांग्रेस ने ईद वाले दिन अपने कार्यालय का ताला ही नहीं खोला था. लेकिन देखना होगा इस ईद पर पीसीसी में बकरे की कुर्बानी और विशेष नमाज होती है या नही?

फ़िलहाल, इन बयानों से ये तो साफ़ हैं कि कांग्रेस की मुश्किलें आगे और बढ़ने वाली हैं क्योंकि चुनावी साल में बीजेपी इस मुद्दे को इतनी जल्दी अपने हाथ से जाने नहीं देगी.