पूरे देश की प्रार्थनाएं और बचाव दल के 17 दिनों की अथक मेहनत मंगलवार शाम रंग ले आई। उत्तराखंड की सिल्क्यारा-डंडालगांव टनल में 12 नवंबर से फंसे 41 मजदूरों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। पहला मजदूर शाम 7.50 बजे बाहर निकाला गया।

झारखंड निवासी विजय होरो को सबसे पहले निकाला गया। इसके बाद दूसरे मजदूर गणपति होरो को सुरंग से बाहर निकाला गया। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया।  सुरक्षित निकाले गए सभी मज़दूरों को एम्बुलेंस से अस्पताल भेजा गया।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बचाव अभियान की सफलता को सभी को भावुक कर देने वाला बताया। उन्होंने लिखा कि उत्तरकाशी में हमारे श्रमिक भाइयों के रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता हर किसी को भावुक कर देने वाली है। टनल में जो साथी फंसे हुए थे, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि आपका साहस और धैर्य हर किसी को प्रेरित कर रहा है। मैं आप सभी की कुशलता और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।  यह अत्यंत संतोष की बात है कि लंबे इंतजार के बाद अब हमारे ये साथी अपने प्रियजनों से मिलेंगे। इन सभी के परिजनों ने भी इस चुनौतीपूर्ण समय में जिस संयम और साहस का परिचय दिया है, उसकी जितनी भी सराहना की जाए वो कम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे लिखा कि मैं इस बचाव अभियान से जुड़े सभी लोगों के जज्बे को भी सलाम करता हूं। उनकी बहादुरी और संकल्प-शक्ति ने हमारे श्रमिक भाइयों को नया जीवन दिया है। इस मिशन में शामिल हर किसी ने मानवता और टीम वर्क की एक अद्भुत मिसाल कायम की है।

वहीं मज़दूरों के सुरक्षित बाहर आने के साथ ही चारों ओर खुशी का माहौल बन गया। मजदूरों को मलबा भेदकर ड्रिलिंग मशीन के जरिए सुरंग बनाकर निकाला गया। 800 एमएम के पाइप सुरंग में डाले गए। इन पाइपों के जरिए एक-एक कर मजदूरों को बाहर निकाला गया और वो रेंगते हुए बाहर निकाले गए। जो मजदूर कमजोर हैं या किसी वजह से रेंगते हुए बाहर नहीं आ सके उनके लिए एक स्ट्रेचर बनाया गया था, जिसमें पहिए लगे हुए हैं. इन मजदूरों स्ट्रेचर पर लिटाकर रस्सी के जरिये बाहर खींचा गया।

प्रशासन की ओर से मजदूरों के सुरंग से बाहर आने के बाद सारी तैयारियां की गईं थी। यहां पर एंबुलेस और डॉक्टरों की टीम तैनात रही।  सुरंग से बाहर निकलते ही इन मजदूरों के प्राथमिक परीक्षण के लिए सुरंग के बाहर बनाए गए अस्थायी अस्पताल में ले जाया गया।  इसके साथ ही यहां एक हैलीकॉप्टर भी तैनात किया गया था ताकि किसी को अगर जरुरत हो तो उसे तत्काल बड़े अस्पताल ले जाया जा सके।