अमरनाथ में आपदा के बाद इतना खौफनाक मंजर है कि लोग दहल उठे हैं. अब यहां से कई लोग लौट भी रहे हैं. मध्यप्रदेश के इंदौर के कई यात्री बताते हैं कि अमरनाथ में अभी बड़ी विकट स्थिति है। बादल फटने की घटना के बाद हम सुरक्षित जरूर हैं लेकिन अभी दर्शन नहीं हो सकते हैं क्योंकि अभी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। हम अब बिना दर्शन किए ही लौटना चाहते हैं। इन लोगों ने मप्र शासन से गुहार लगाई है कि वह हमारी मदद करें।

यह पीड़ा अमरनाथ में फंसे इंदौर के साथ ही बुरहानपुर व सीहोर के लोगों की भी है। इंदौर के बाणगंगा निवासी कल्लू राठौर 3 जुलाई को अपने दामाद सचिन वारूढ़े, समधि सुधाकर, समधन कुसुम, नाती श्रेयस व साले अतुल और उनकी पत्नी लक्ष्मी राठौर के साथ भोपाल से अमरनाथ के लिए रवाना हुए थे. अभी पंचतरणी में एक टेंट में ठहरे हैं। इनमें तीनों बुजुर्गों की तबियत खराब बहुत है और ब्लड प्रेशर लो है।

मोबाइल पर चर्चा में सचिन ने बताया कि 6 जुलाई को शाम करीब 5.30 बजे हम अमरनाथ गुफा से करीब 200 मीटर ही दूर थे तभी बादलों की जोरदार गड़गड़ाहट हुई। यह आवाज सामान्य नहीं थी और इससे हम घबरा गए। तभी हर ओर से पानी का तेज बहाव दिखा और वहां लगे टेंट और लोग तेजी से बहने लगे। हम जहां थे तब सुरक्षित थे लेकिन काफी घबराहट सी हो रही थी। पानी में बहते हुए लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे लेकिन हर कोई असहाय था। हम भी अपना सामान लेकर पंचतरणी की ओर भागे। करीब दो किमी चलने के बाद मेरे बुजुर्ग माता-पिता और ससुर थक चुके थे। हमने घोड़े पर पंचतरणी जाने के लिए बात की तो जहां घोड़े का किराया 1500 रु. लगता था वह 6 हजार रुपए बताया। मजबूरन हमने तीनों को 18 हजार रुपए देकर घोड़े से रवाना किया जबकि हम उनके पीछे पैदल पंचतरणी के लिए रवाना हुए.रात करीब 1 बजे पहुंचे।

पंचतरणी पर जहां टेंट का किराया 150 रुपए था, वहां अब 4 हजार रुपए चार्ज बताया गया। सभी के जेहन में रातभर वही दहशत वाला मंजर कौंधता रहा और हम सो नहीं सके। अभी भी घबराहट है कि अब बिना दर्शन किए लौटना चाहते हैं। यहां पर लंगर में भोजन की व्यवस्था तो है लेकिन दूसरी कोई भी चीज काफी महंगी है।