सत्ता में आने के बाद से विवादों में घिरी पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार ने घरों में राशन पर अनाज बांटने का फैसला किया है। खाद्यान्न की डोर-टू-डोर डिलीवरी की योजना से राशन की दुकानों में कदाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
पंजाब के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणापत्र में दिए गए वादों के मुताबिक फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। 25,000 सरकारी पदों को भरने के निर्णय की घोषणा की। इसके बाद राशन की दुकानों से आमजन तक खाद्यान्न पहुंचाने का निर्णय लिया गया। यह फैसला स्वैच्छिक होगा। यानी लाभार्थी के अनुरोध पर अनाज को निवास स्थान पर पहुंचाया जाएगा। नागरिकों के पास दुकानों पर जाकर अनाज खरीदने का विकल्प होगा। गेहूं और दाल को बोरियों में पैक कर लाभार्थी के घर पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि योजना को कैसे लागू किया जाएगा इसकी रूपरेखा जल्द ही तय की जाएगी।
इस योजना से नागरिकों को कैसे लाभ होगा?
इस समय पंजाब में करीब 1|5 करोड़ राशन कार्ड धारक गेहूं और दाल खरीदते हैं। अगर आप इस योजना में घर पर अनाज चाहते हैं तो आपको सरकारी विभाग से अनुरोध करना होगा। तदनुसार एक निश्चित दिन पर अनाज घर में पहुंचा दिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि नागरिकों को राशन के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। देश में राशन की दुकानों में बदसलूकी आम बात है| अब तक कई शिकायतें मिली हैं कि लोगों के नाम पर अनाज बेचा जा रहा है और दूसरे व्यापारियों को बेचा जा रहा है| देश में अब तक हजारों दुकानदारों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए। लेकिन व्यवस्था में कुछ भी नहीं बदला है। उम्मीद है कि घरों तक खाद्यान्न पहुंचाने से कदाचार पर अंकुश लगेगा। फिर भी कोई गारंटी नहीं दे सकता कि इस योजना का दुरूपयोग नहीं होगा। तस्वीर तभी बदल सकती है जब सरकारी अधिकारी अनाज वितरण योजना पर पूरा ध्यान दें और वर्षों से अनाज परिवहन और वितरण ठेकेदारों को बदल दें।
दिल्ली में क्यों अटकी यह योजना?
दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने घरों में राशन पहुंचाने की योजना की घोषणा की थी। केंद्र की भाजपा सरकार और दिल्ली की आप सरकार के बीच शीत युद्ध ने योजना को सबसे पहले प्रभावित किया। राशन दुकानदार संघ इस डर से अदालत पहुंचा कि अनाज घर पहुंच जाएगा और उनका कारोबार प्रभावित होगा। केंद्र ने एक स्टैंड लिया है कि राज्य सरकार अनाज सुरक्षा योजना के कार्यान्वयन में एक अलग भूमिका नहीं निभा सकती है। आम आदमी पार्टी (आप) का आरोप है कि भाजपा पार्टी की किसी भी जनहितैषी योजना का विरोध करती है। उपराज्यपाल किसी भी योजना को तत्काल स्वीकृति नहीं देते।
आप सरकार को कैसे फायदा पहुंचाएंगे?
दिल्ली सरकार के पास पूरा अधिकार नहीं है। कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे जैसे कानून और व्यवस्था, भूमि आदि केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में हैं। वहीं पंजाब में सरकार के पास कोई भी फैसला लेने का पूरा अधिकार है। आरोप ये भी है कि जिन राज्यों में विपक्ष सत्ता में है, वहां महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राज्यपाल का हस्तक्षेप बढ़ रहा है। पंजाब सरकार कानून में बदलाव करे या नए कानून बनाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है कि राज्यपाल की तत्काल मंजूरी मिल जाएगी।