भोपाल,
इसके लिये जेपी हॉस्पिटल कैम्पस में संचालित समर्पण केन्द्र को टूरिज्म डिपार्टमेंट के सहयोग से रेनोवेट किया गया है। इसमें दिल में छेद, टेढे पैर, सुनने, देखने में परेशानी जैसी विकृतियों से वास्त बच्चों के इलाज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों को अनुभूति (सेंसेशन) करने के लिए सेंसरी गार्डन में अलग-अलग प्रकार का की सत तैयार की गई हैं। इस सतह पर चलकर बच्चों को यह अनुभव जाएगा कि ,
छूकर महसूस करेंगे बच्चे
जानकारों का कहना है कि इस सुविधा का औपचारिक लोकार्पण जल्द मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों कराया जा सकता है। सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी का कहना है कि जन्म के समय से ही कुछ बच्चों में गंभीर बीमारियां पाई जाती हैं यदि इन बीमारियों की समय से पहचान हो जाए तो उन्हें जल्दी इलाज और सर्जरी कराकर जीवन भर की तकलीफ से बचाया जा सकता है। अर्ली इंटरवेंशन सेंटर को इसलिए नए स्वरूप में तथा पूरी तरह से विशेष बच्चों के हिसाब से तैयार किया गया है। सेंटर की दीवारें, छत, फॉल सीलिंग बच्चों के हिसाब से बनाई गई हैं। दीवारों को छूकर बच्चों को कंकड़, पत्थर, रेत, घास, जंजीर जैसे अनुभव होंगे। वॉल पर पेंटिंग, उभरते हुए कार्टून, जानवर चिपकाए गए हैं। छतों पर बादल, तितली की फॉल सीलिंग लगाकर उसमें लाइटिंग की गई है।
सेंटर में मुफ्त सुविधाएं
कंकरीली, रेतीली, घास वाली, चिकनी और पथरीली जमीन कैसी होती है।
दरअसल, अर्ली इंटरवेंशन सेंटर की अवधारणा यही है कि बच्चों में बीमारियों की जल्दी पहचान कर उनका इलाज कराने की है। सेंटर में शिशु रोग विशेषज्ञ, दंत रोग विशेषज्ञ, नेत्र सहायक, ऑडियोलॉजिस्ट कम स्पीच थैरेपिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, स्पेशल एजुकेटर बच्चों की जांच और इलाज करते हैं। फील्ड में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमें 0 से 18 साल तक के विकृति ग्रस्त बच्चों की पहचान कर डीईआईसी में रेफर करते हैं यहां बच्चे की आंख, कान, मानसिक, शारीरिक विकास सहित पूरी जांच की जाती है। बीमारी की पहचान के बाद बच्चे का आगे का इलाज और सर्जरी की जाती है। सुनने में अक्षम बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट, हार्ट की सर्जरी देश भर के अस्पतालों में सरकारी खर्चे पर आरबीएसके प्रोग्राम से फ्री कराई जाती है।