भोपाल: राज्य के वन विभाग के एक अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने ग्वालियर में पदस्थी के दौरान वन विभाग के रेस्ट हाऊस को अपना निवास बना लिया और उसमें होने वाले पानी-बिजली आदि के व्यय का भुगतान शासकीय खजाने से कराया। इसकी शिकायत मिलने पर लोकायुक्त ने मामले में संज्ञान लेकर वन मुख्यालय से जवाब तलब कर लिया है।

लोकायुक्त के पास पहुंची शिकायत के अनुसार, एपीपीसीएफ शशि मलिक (वर्तमान में वन मुख्यालय भोपाल में पदस्थ) पदेन मुख्य वन संरक्षक के रुप में ग्वालियर में पदस्थ थे।  उन्होंने अपने पद के कर्तव्यों एवं अधिकारों का दुरुपयोग ग्वालियर स्थित वन विभाग के शासकीय रेस्ट हाउस पर कब्जा करते हुए उसको अपना निवास बना लिया एवं उसमें वे अनधिकृत रूप से रह रहे।

उक्त रेस्टहाऊस के कक्ष के बाहर उन्होंने अपने नाम एवं पद की पट्टिका भी नहीं लगवाई जबकि यदि कोई भवन किसी पदाधिकारी के लिए आरक्षित होता है तो उस पद की पट्टी का हमेशा लगी रहती है, केवल व्यक्ति के नाम परिवर्तित होते रहते हैं। अन्य सभी अधिकारियों के घर के बाहर उनके नाम और पद युक्त पट्टिका लगी हुई है।

मलिक ने अपने नाम या पद से विद्युत का कनेक्शन भी नहीं लिया गया। उनके कक्ष में लगातार एसी और हीटर चलते रहते रहे एवं विद्युत का उपयोग होता रहा, जिसके बिलों का भुगतान भी शासन के खाते से किया जाता रहा। नलिका जिस कक्ष में रह रहे, उसमें विद्युत के 2 मीटर लगे हुए थे तथा दोनों मीटर रेस्ट हाउस के नाम पर व्यवसायिक उपयोग हेतु पंजीबद्ध किए थे।

इधर नोटिस भी जारी हुआ :

इधर शशि मलिक के खिलाफ इसी मामले की अन्य स्रोत से शिकायत मिलने पर वन मुख्यालय ने कारण बताओ भी नोटिस भी जारी कर दिया है जबकि लोकायुक्त में शिकायत होने एवं वहां इस पर संज्ञान लेकर जवाब तलब किये जाने से इस नोटिस को भेजने की जरुरत नहीं थी।