भोपाल: मप्र में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने के लिये विधि विभाग ने 11 अन्य विभागों से अभिमत मांगा है। दरअसल भाजपा विधायक डा. सीतासरन शर्मा ने मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस को पत्र लिखा है कि प्रदेश में बढ़ती जनसंख्या पर प्रभावी कानून के अभाव में बढ़ती बेरोजगारी, पर्याप्त आवासों की कमी, अतिक्रमण, सडक़-रेलगाड़ृी से आवागमन के सार्वजनिक साधन की अनुपलब्धता, कृषि भूमि कम होना सहित अनेक समस्याओं का निराकरण, सरकार और प्रशासन नहीं कर पा रहे हैं।

इसलिये जनसंख्या पर प्रभावी नियंत्रण हेतु एक नियत तिथि के बाद दो से अधिक बच्चों वाले पालकों को शासकीय/अर्धशासकीय संस्था में नौकरी पर रोक लगे, शासकीय ठेके पर रोक लगे, विधायक/सांसद/नगरीय निकाय/पंचायत निकाय/सहकारिता/मंडी सहित अन्य चुनाव लडऩे पर रोक लगे, राष्ट्रीयकृत बैंकों से शिक्षा/कृषि ऋण सहित अन्य ऋणों पर रोक लगे या बढ़ी हुई ब्याज दर पर ऋण दिये जायें, सभी प्रकार के आरक्षण एवं उससे जुड़ी सुविधाओं पर रोक लगे, सभी प्रकार की सरकारी सहायता/सुविधाओं/अनुदान यथा आवास योजना, परिवार सहायता, आयुष्मान सहित अन्य योजना पर रोक लगे तथा मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल में किसी भी पद/दायित्व से वंचित करने जैसे प्रावधान होने चाहिये। इसके लिये एक प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने के लिये विधि विभाग से कहा जाये।

मुख्य सचिव के निर्देश पर विधि विभाग ने 11 विभागों को पत्र लिखकर उनका इस कानून को बनाने के संबंध में अभिमत मांगा है। ये 11 विभाग हैं : जीएडी, लोनिवि, संसदीय कार्य, नगरीय प्रशासन, पंचायत, सहकारिता, कृषि, वित्त, जल संसाधन, महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग। इधर विधि विभाग ने स्पष्ट किया है कि कार्य आवंटन नियमों में मांग किये गये विषयों पर कानून बनाने का विधि विभाग को अधिकार नहीं है।