ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव यानी खाने वाली गर्भनिरोधक गोलियां गर्भावस्था से बचाव का एक हार्मोन आधारित तरीका है । इसके साथ ही ये गोलियां अनियमित, दर्दभरे और अधिक रक्त नाव वाले मासिक चक्र को नियंत्रित करने तथा एंडोमेट्रियोसिस, एक्ने एवं प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) जैसी स्थितियों से बचाव में भी मदद करती है। इन गोलियों का सेवन बड़े पैमाने पर किया जाता है लेकिन अधिकांशतः इसके लिए पर्याप्त सलाह नहीं ली जाती।
ये गोलियां अधिक मात्रा में लेने, ज्यादा समय पर लेने और गलत' तरीके से लेने पर गंभीर परिणाम भी दे सकती हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के इन्हें लेना अपनी जान को खतरे में डालना है।
अलग-अलग परिणाम
बर्थ कंट्रोल पिल्स कई तरह की होती हैं। डॉक्टर शारीरिक स्थिति की जांच करके आपको किसी गोली का सुझाव दे सकते हैं। इन गोलियों में सिंथेटिक प्रकार के हार्मोन्स होते हैं। जिनमें एस्ट्रोजन या प्रोजेस्टोरॉन या फिर कई बार दोनों एक साथ भी हो सकते हैं। जिस गोली में दोनों साथ होते हैं उसे कॉम्बिनेशन पिल्स कहा जाता है।
साइड इफेक्ट्स
इन गोलियों के कुछ आम साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं
• इंटरमेन्स्ट्रुअल स्पॉटिंग • नॉशिया
• स्तनों में पीड़ा • सिरदर्द या माइग्रेन
• मूड में परिवर्तन वजन बढ़ना
• पीरियड्स का न आना
• आंखों की रोशनी पर असर पड़ना
• वेजाइनल डिस्चार्ज
• रक्त अशुद्ध होने का खतरा
हार्मोन्स में असंतुलन पैदा करने वाली या हार्मोन्स के जरिए शरीर पर असर डालने वाली कोई भी दवाई रक्त की शुद्धि पर असर डाल सकती हैं। इससे त्वचा संबंधी समस्याओं के अलावा कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की आशंका भी बढ़ सकती है। कोशिश करें कि गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग करने से पहले पति-पत्नी • दोनों डॉक्टर से पूरी काउंसिलिंग लें। साथ ही कुछ प्राकृतिक तरीकों के बारे में भी जानें। याद कि आपका स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है, इससे किसी भी तरह की खिलवाड़ जानलेवा हो सकती है।
ये भी हैं खतरे
कॉम्बिनेशन पिल्स यानी जिस गोली में दोनों हार्मोन्स एक साथ होते हैं. वे खून का थक्का बनने, डीप वेन थ्रोम्बोसिस, फेफड़ों पर क्लॉट, स्ट्रोक या हार्ट अटैक जैसी कार्डियोवैस्क्युलर डिसीज की आशंका को बढ़ा सकती हैं। वहीं वर्थ कंट्रोल पिल्स, ब्लड प्रेशर के बढ़ने, बिनाइन लिवर ट्यूमर और कुछ प्रकार के कैंसर का भी खतरा पैदा कर सकती हैं।