पिछले एक सप्ताह में दक्षिणी और मध्य राज्यों में जल भंडारण की स्थिति में काफी वृद्धि हुई है और यह देश के बाकी हिस्सों की तुलना में बेहतर है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के अनुसार, भारत के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश ने पिछले एक सप्ताह में कई जलाशयों में पानी का प्रवाह बढ़ा दिया है।

सीडब्ल्यूसी द्वारा 12 जुलाई, 2022 को जारी एक बुलेटिन में पाया गया कि निकाय द्वारा निगरानी किए गए देश के 143 जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 71.108 बीसीएम (अरब घन मीटर) थी। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 40 प्रतिशत है।

हालिया वृद्धि इस साल 7 जुलाई को दर्ज 30 प्रतिशत से एक उल्लेखनीय सुधार है। जून में मानसून शुरू होने के बाद से अनियमित बारिश के कारण जल स्तर में गिरावट आ रही थी। 40 प्रतिशत या उससे कम पानी वाले जलाशयों की संख्या भी कम हो गई है- पिछले सप्ताह ऐसे 91 जलाशयों से 14 जुलाई तक 66 हो गए हैं।

हालांकि, अभी भी नौ राज्य ऐसे हैं जहां सामान्य स्तर से कम भंडारण है (जो कि पिछले 10 वर्षों का औसत है)। ये हैं हिमाचल प्रदेश, पंजाब, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, नागालैंड, बिहार और उत्तर प्रदेश। सबसे ज्यादा डिपार्चर हिमाचल प्रदेश और बिहार में सामान्य से 40 फीसदी कम स्टोरेज पर देखा गया। इसके बाद झारखंड (31 फीसदी), ओडिशा (28 फीसदी) और पंजाब (27 फीसदी) का नंबर आता है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के मुताबिक, आठ राज्यों में कम बारिश हुई है और एक राज्य में बड़ी कमी है, जबकि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पूरे देश को कवर किया है। महत्वपूर्ण जलविद्युत उत्पादन वाले 46 जलाशयों में से, 19 जलाशयों में भंडारण निर्माण सामान्य से कम या उसके बराबर है।

पिछले एक सप्ताह में दक्षिणी और मध्य राज्यों में भंडारण की स्थिति में काफी वृद्धि हुई है और यह देश के बाकी हिस्सों की तुलना में बेहतर है। पांच राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के 40 जलाशयों में उनकी क्षमता की तुलना में 55 प्रतिशत भंडारण था।

साथ ही 7 जुलाई को यह 40 प्रतिशत था। इसी तरह, गुजरात और महाराष्ट्र के 46 जलाशयों में भंडारण इस सप्ताह 26 प्रतिशत से बढ़कर 43 प्रतिशत हो गया है, क्योंकि पश्चिमी भारत में भारी बारिश जारी है। पूर्वी क्षेत्र में सबसे कम भंडारण 20 प्रतिशत थी, इसके बाद उत्तरी क्षेत्र में 26 प्रतिशत और मध्य क्षेत्र में 36 प्रतिशत थी।

औसत समुद्र तल से 7.6 किमी ऊपर तक संबंधित चक्रवाती परिसंचरण के साथ पूर्वोत्तर अरब सागर और उससे सौराष्ट्र और कच्छ के सटे तटीय क्षेत्रों पर अच्छी तरह से चिह्नित निम्न दबाव का क्षेत्र विद्यमान है। इस मौसम प्रणाली के धीरे-धीरे पश्चिम की ओर बढ़ने और अगले 24 के दौरान और अधिक तीव्र होकर एक अवसाद (डिप्रेशन) के रूप में केंद्रित होने की संभावना है।

औसत समुद्र तल से 7.6 किमी ऊपर तक संबद्ध चक्रवाती  परिसंचरण के साथ तटीय ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों  पर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है।

औसत समुद्र तल से 1.5 किमी तक मॉनसून की ट्रफ अब पूर्वोत्तर अरब सागर और सौराष्ट्र और कच्छ के आसपास के तटीय क्षेत्रों में अच्छी तरह से चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र के केंद्र, दीसा, सागर, पेंड्रा रोड, हीराकुंड, तटीय ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों पर स्थित निम्न दबाव क्षेत्र का केंद्र और वहां से दक्षिण-पूर्व की ओर पूर्व मध्य बंगाल खाड़ी की से होकर गुजर रही है।