लोकतंत्र में जनता ही भगवान होती है. शायद तभी कब किसे सत्ता की दहलीज चढ़ाना या फिर उतारना हैं, उन्हें अच्छी तरह से आता हैं. नेता भी चुनावी मौसम में ही सही पर जनता को खुश करने में लगे रहते हैं. हालांकि, कई बार अजीबोगरीब बयानबाज़ी भी मुश्किल में डाल देती हैं.

इसका सबसे सटीक उदाहरण कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला का एक बयान है. दरअसल, लोकतंत्र का हवाला देने वाली कांग्रेस के नेता ही आज जनता से उनके अधिकार छीनने की बात कर रहे हैं. 

एक तरफ संविधान किसी भी दल, संगठन या विचारधारा से जुड़ने की पूरी आज़ादी देता है. इतना ही नहीं बिना किसी दबाव के जनता को भी अपनी इच्छा अनुसार वोट देने का पूरा अधिकार है. वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने सभी नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए न सिर्फ बीजेपी समर्थकों बल्कि वोटरों को भी राक्षस प्रवृत्ति का बताया.

दरअसल, सुरजेवाला हरियाणा के कैथल में जनसभा को संबोधित कर रहे थे. यहां उन्होंने बेरोजगारी के मुद्दे पर खट्टर सरकार को जमकर घेरा. इसी दौरान अपने भाषण में उन्होंने कहा, भाजपा और जेजेपी राक्षसों की पार्टियां हैं. जो लोग भाजपा को वोट देते हैं और उनका समर्थन करते हैं, वे भी राक्षस प्रवृत्ति के हैं. आज महाभारत की इस भूमि पर मैं उन्हें (बीजेपी-जेजेपी) श्राप देता हूं.

क्या आप जनता को "राक्षस" मानते हैं? CM शिवराज

इस बयान के बाद से ही बीजेपी के तमाम नेता कांग्रेस को घेरने में लगे हुए हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस बयान पर पलटवार किया. उन्होंने कहा, जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है. कांग्रेस नेता जनता को राक्षस कह रहे हैं. क्या बीजेपी को वोट देने वाले करोड़ों लोग "राक्षस" हैं?

आप सोनिया गांधी और राहुल गांधी क्या मानते हैं? क्या आप जनता को "राक्षस" मानते हैं? भाजपा जनता को भगवान मानती है. मैं हमेशा कहता हूं कि मध्य प्रदेश मेरा मंदिर है, वहां रहने वाले लोग मेरे भगवान हैं और हम उस भगवान के पुजारी हैं. लेकिन आप अपने आप को भगवान मानते हैं. क्या यही आपकी 'मोहब्बत की दुकान' है?

इसी मानसिक स्थिति की वजह से खोया जनाधार-

बीजेपी के आईटी हेड अमित मालवीय ने भी इस बयान पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा, भाजपा को वोट देने वालों को “राक्षस” कह रहे हैं राहुल गांधी के ख़ास सुरजेवाला, श्राप भी दे रहे हैं! कांग्रेस, उसके आलाकमान और दरबारियों की इसी मानसिक स्थिति की वजह से पार्टी और उसके नेता जनाधार खो चुके हैं. लेकिन, अभी तो इन्हें जनता के दरबार में और जलील होना है.

वैसे, कई राज्यों में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के आग़ाज के चलते ये मुद्दा इतनी जल्दी तो शांत नहीं होगा. क्योंकि, चुनावी मौसम में मिलने वाले इस पके पकाए मुद्दे पर बीजेपी लाभ न उठाएं ऐसा हो ही नहीं सकता.