भोपाल: बालाघाट जिले में वन विभाग के भ्रष्टाचार की एक और परत खुल गई है, जहां 8 लाख रुपए की लागत से बना स्टॉप डेम महज दो महीने में ही पहली बारिश में बह गया। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने के बजाय विभाग ने मामले को ‘तेज बहाव’ का नाम देकर लीपापोती कर दी। इतना ही नहीं, अब उसी डेम का दोबारा निर्माण भी चुपचाप कराया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार दक्षिण सामान्य वनपरिक्षेत्र लामता के चाचेरी सर्किल के कक्ष क्रमांक 1330 स्थित कटंगनाला में वर्ष 2024-25 की कार्य योजना के तहत स्टॉप डेम निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। करीब 8 लाख रुपए की लागत वाले इस निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उत्तर सामान्य वनमंडल लामता को सौंपी गई थी। निर्माण कार्य 25 फरवरी 2025 को शुरू हुआ और 22 मार्च 2025 को इसे पूर्ण घोषित कर दिया गया। विभाग ने न केवल कार्य पूर्ण होने का प्रमाण दे दिया, बल्कि पूरी राशि का आहरण भी कर लिया। लेकिन निर्माण की असलियत तब सामने आई जब पहली ही बारिश में यह डेम पूरी तरह बह गया। यह साफ संकेत है कि निर्माण कार्य में भारी स्तर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार हुआ है, जिससे सरकारी धन की बंदरबाट की गई।
नहीं हुई कार्यवाही?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भ्रष्टाचार का डेम पानी में बह गया। बावजूद इसके विभाग ने न तो निर्माण एजेंसी पर कोई कार्रवाई की और न ही जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया। उल्टा इस पूरे मामले को पानी के तेज बहाव का परिणाम बताकर क्लीन चिट दे दी गई। इस मामले की शिकायत भी हुई, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्यवाही शून्य है?
फिर शुरू हुआ निर्माण, लेकिन पैसे कहां से?
अब उसी स्थान पर स्टॉप डेम का पुन: निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इस बार सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसके लिए राशि कहां से आ रही है। विभाग के पास इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस पुनर्निर्माण की जानकारी नहीं होना पूरे मामले को और संदिग्ध बना रहा है।
इनका कहना
इस मामले में मौके पर टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। उसी स्थान पर हो रहे पुन: निर्माण की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। निर्माण कार्य के लिए फिलहाल विभाग से कोई मद भी जारी नहीं किया गया है।
रेशम सिंह धुर्वे, डीएफओ, बालाघाट