दरअसल 13 से 16 मई तक अलग- अलग स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। एक तरफ शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी तो दूसरी ओर भगवान नरसिंह प्रकट उत्सव मनाया जाएगा। बुद्ध पूर्णिमा और स्नान दान पूर्णिमा भी मनेगी। आज वैशाख माह का दूसरा और मई का पहला प्रदोष व्रत है। यह व्रत शुक्रवार को होने के कारण शुक्र प्रदोष व्रत है। मान्यता है कि शुक्र प्रदोष व्रत रखने वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस दिन प्रदोष काल के शुभ मुहूर्त में भगवान में भोलेनाथ की पूजा की जाती है। शुक्र प्रदोष वाले दिन शाम करीब पौने 4 बजे से सिद्धि योग लग रहा है और हस्त नक्षत्र रहेगा। ये दोनों ही मांगलिक एवं शुभ कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं

भगवान नरसिंह प्रकट उत्सव:

हिंदू धर्म में प्रत्येक वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को नरसिंह प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है। इस बार यह कल यानी 14 मई शनिवार को है, जो रवि व सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाया जाएगा।

दिन भगवान नरसिंह की उपासना करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विष्णु भगवान की कृपा से सभी मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं। इसके अलावा नरसिंह प्रकट उत्सव के पावन अवसर पर कुछ मंत्रों का जाप करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। शनिवार होने के कारण शनि मंदिरों में शनि देव के पूजा-पाठ होंगे।

वैसाखी व्रत पूर्णिमा:

वैशाख शुक्ल पक्ष व्रत पूर्णिमा रविवार 15 मई को रवि योग में मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य मेष से वृष राशि में प्रवेश करेंगे। पौराणिक मान्यता के अनुसार, वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए नरसिंह अवतार लिया था। तब से इस दिन को नरसिंह प्रकट उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

स्नान दान बुद्ध पूर्णिमा:

वैशाख शुक्ल पक्ष स्नान दान बुद्ध पूर्णिमा सोमवार 16 मई को है। भगवान बुद्ध की जयंती के साथ वैशाख स्नान का समापन होगा। हजारों घरों, मंदिरों, तीर्थ स्थल, पवित्र नदियों में सत्यनारायण की कथाएं होगी। इस दिन खग्रास चंद्र ग्रहण पड़ेगा। हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा। मंदिरों में पूजा-पाठ होगा। सूतक नहीं माना जाएगा। भारत में सुबह के 7-58 से 11-25 तक का समय रहेगा। न्यूजीलैंड, कनाडा, जर्मन, अमेरिका समेत जिन देशों में रात्रि रहेगी, वहां चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान बुद्ध और चंद्र देव की भी पूजा की जाएगी। उल्लेखनीय है कि भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना गया है।