राजधानी भोपाल के चुना भट्टी और सर्व-धर्म पुल (कोलार रोड) स्थित भोज मुक्ता विश्वविद्यालय परिसर में बाघ की आवाजाही से हड़कंप मच गया है. रात में बाघ कुलपति जयंत सोनवलकर के परिसर स्थित बंगले के बाहर पहुंच गया और 1 घंटे तक बैठा रहा.  करीब दो साल पहले भी कैंपस में बाघ देखा गया था। 

कुलपति सोनवलकर ने कहा कि बंगले के बाहर दोपहर 12:30 बजे के बाद जानवरों की दहाड़ सुनाई दी। मैंने खिड़की से बाहर देखा तो एक बाघ दिखाई दिया। तेंदुआ पौने डेढ़ बजे तक रहा। वन विभाग व पुलिस को सूचना दी गई, तब तक पैंथर भाग चुका था। गीली जमीन पर तेंदुए के पैरों के निशान मिले हैं। विश्वविद्यालय परिसर 25 एकड़ में फैला हुआ है। 2 साल पहले पैंगोलिन मूवमेंट भी देखा गया था।

रात में बाघ कुलपति जयंत सोनवलकर के बंगले के बाहर परिसर में पहुंच गया और एक घंटे तक बैठा रहा। देर रात तक कुलपति के परिजन दहशत में आ गए। 

भोज विश्वविद्यालय परिसर में कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए कार्यालय के साथ-साथ आवास भी हैं। इन घरों में रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है, कोई भी अकेले घर छोड़ने की हिम्मत नहीं कर रहा। वन विभाग ने भी यहां गश्त तेज कर दी है।

वन अमले का कहना है कि वह पगमार्क बाघ के नहीं, बल्कि तेंदुए के हैं। सुरक्षा गार्ड ने बताया है कि वह दहशत से गिर गया था, इसलिए वह ठीक से नहीं देख पाया। उसने गुर्राने की आवाज सुनी और टॉर्च से देखा तो आंखें चमक रही थीं।

हालाकि उधर, विवि के कर्मचारियों में चर्चा है कि कुलपति पर मां दुर्गा की कृपा है। 2019 में चैत्र माह की चतुर्थी को बाघ आया था। अब गुप्त नवरात्र में बाघ आया।  हालाकि अब cctv फुटेज से साफ़ हो गया कि महाशय वनराज बाघ ही हैं| अभी तो इनकी कृपा बनी हुयी है लेकिन डर इस बात का है कि ये कभी बिगड़ गये तो क्या होगा| भोपाल शहर रातापानी सेंचुरी से सटा है| यहां हुई गणना में आई बाघ और तेंदुए की संख्या चौंकाने वाली है। अधिकारियों का कहना है कि सेंचुरी में 60 से 80 बाघ और 500 से ज्यादा तेंदुए होंगे। पिछली गिनती यानी 2018 के हिसाब से अभी यहां 47 बाघ और 325 तेंदुए हैं। यह देश की पहली ऐसी सेंचुरी बन गई है, जहां सबसे ज्यादा बाघ और तेंदुए हैं। इनमे से कई भोपाल शहर के आसपास घुमते हैं जो शहर के अंदर भी नज़र आते हैं|

कुछ दिनों पहले कोलार रोड पर चुना भट्टी के पास गोल्डन जुबली पार्क में एक बाघ देखा गया था।