भोपाल: भोपाल विकास प्राधिकरण 'बीडीए' ने शहर में आवासहीनों को जो फ्लैट बेचे हैं उनमें से 75 प्रतिशत में किराएदार रह रहे हैं। यह एक बड़ा भ्रष्टाचार है। जिसे बीडीए के अधिकारियों ने अंजाम दिया है।
इस तरह प्रधानमंत्री आवास योजना में आवास खरीदने के बदले मिली हजारों अपात्र लोगों को डेढ़ से ढाई लाख रुपये सब्सिडी दिलवा दी गई है। सक्षम लोगों को आवास देकर आवासहीनों का हक भी मारा गया है।
बीडीए के राजस्व शाखा, ऑडिट शाखा, चयन शाखा और लॉटरी के लिए जिम्मेदार नामित अधिकारियों द्वारा यह गोलमाल घरौंदा आवासीय परिसर, स्वर्गीय प्यारेलाल खंडेलवाल आवासीय परिसर समेत अन्य परिसरों में किया है। इन परिसरों से किरायेदारों को लेकर सीएम हेल्पलाइन, 100 डायल, बीडीए, पुलिस थानों में लगातार शिकायतें हो रही हैं।
पोल खुलने के डर से संबंधित अधिकारी बीडीए से तबादला करवा रहे हैं तो कुछ ने शाखाएं बदलवा ली हैं। इस गोलमाल से आवासहीनों को आवास नहीं मिले और इन परिसरों में जो वाजिब आवंटी रह रहे हैं उनके लिए फर्जी आवासहीनों की हरकतें अलग सिरदर्द बनी हुई है।
उल्लेखनीय है कि भोपाल विकास प्राधिकरण ने अफोर्डेबल योजना के तहत शहर में 10 हजार से अधिक फ्लैट बेचे हैं। उनकी बिक्री बीते सात वर्षों से की जा रही है। जिन्होंने इन फ्लैटों को खरीदा है उन्हें डेढ़ से ढाई लाख रुपये की सब्सिडी मिली है। यह राशि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिली है।
आवास आवंटन के लिए बीडीए के कुछ अधिकारियों को पात्रता के अनुरूप आवास आवंटन करना था। जिसमें फ्लैट खरीदने वालों के लिए सबसे बड़ी शर्त उनके नाम पूर्व से आवास नहीं होना थी लेकिन कुल फ्लैट खरीदने वालों में से 75 प्रतिशत ऐसे खरीदार है जिनके पास पूर्व से आवास है और ऐसे लोगों ने सब्सिडी के लिए अफोर्डेबल योजना के तहत बीडीए से सस्ते दामों पर फ्लैट खरीद लिए हैं।
इसमें बीडीए के जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारियों को करोड़ों रुपये कमीशन बतौर मिले हैं। अब इस योजना के तहत बेचे गए फ्लैटों की हकीकत यह है कि इनमें मूल फ्लैट मालिकों का पता नहीं है, किराएदार रह रहे हैं।
सम्पन्न लोगों को दे दिए गरीबों के मकान..
अब बेचे गए फ्लैटों मालिकों की जगह रह रहे किराएदार|
आवासहीनों का हक मारा:
अफोर्डेबल योजना के तहत बीडीए के वन बीएचके फ्लैट पांच लाख में और टू बीएचके फ्लैट 10 लाख रुपये में बेचे गए हैं। ये आवासहीनों को दिए जाने थे। इसके साफ निर्देश थे। तभी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत डेढ़ से ढाई लाख रुपये सब्सिडी की पात्रता भी थी लेकिन फ्लैट खरीदने वाले कुल आवेदनों में से ज्यादातर ऐसे आवेदन आए जिनके पास पूर्व से रहने का ठिकाना था।
ऐसे आवेदनों को बीडीए के राजस्व शाखा, ऑडिट शाखा, चयन शाखा और लॉटरी के लिए जिम्मेदार नामित अधिकारियों द्वारा निरस्त किए जाने थे जो कि नहीं किए गए और इन्हें घरौंदा योजना, स्वर्गीय खंडेलवाल आवासीय परिसर समेत अन्य परिसरों में फ्लैट आवंटित कर दिए।
ऐसे लोगों को 4 से 6 माह बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सब्सिडी की राशि भी मिल गई। अब ऐसे लोगों ने इन फ्लैटों को किराए से दे दिया है।