सर्पों से संबंधित जानकारी देने के लिए @van_vihar भोपाल में सर्प व्याख्या केंद्र भी तैयार किया गया है।
— Department of Forest, MP (@minforestmp) January 21, 2022
सर्पों को करीब से देखना है तो आप भी आइए वन विहार।#JansamparkMP @mptfs @KrVijayShah @CMMadhyaPradesh @MP_MyGov @probhopal @MPSBB_Bhopal @MPTourism @WWFINDIA pic.twitter.com/vMg0JXCbYJ
इसके लिए पार्क प्रबंधन ने पार्क में आने वाले पर्यटकों को सांपों से परिचित कराना शुरू कर दिया है। हर शनिवार और रविवार को पर्यटकों को सांपों के बारे में जानकारी दी जा रही है। कहा जा रहा है कि सांप प्रकृति और पर्यावरण का अहम हिस्सा हैं, जो खाद्य श्रृंखला को बनाए रखते हैं। एमपी में पाए जाने वालों में कोबरा, रसेल वाइपर, रसेल कुकरी, क्रेट, सा-स्केल्ड वाइपर, पेटेड कोरिला, पायथन, क्रेट, वुल्फ स्नेक, सैंड बोआ, अर्थ बोआ जैसी प्रजातियां शामिल हैं। इनमें से कुछ प्रजातियां वन्यजीव सांपों से घिरी हुई हैं। स्नेक एक्सपर्ट का मानना है कि सांपों को लेकर कई भ्रांतियां हैं जिन्हें दूर करने की जरूरत है। भोपाल शहर में हर साल जुलाई से दिसंबर के बीच 300 से ज्यादा सांप निकलते हैं। इनमें से कुछ को पकड़कर जंगल में छोड़ दिया जाता है। घायल सांपों को जंगल में रखकर उनकी देखभाल की जाती है।
सांप पारिस्थितिकी तंत्र की खाद्य श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कोबरा, रैट स्नेक जैसे सांप चूहों को खाते हैं। ये चूहे ज्यादातर अनाज खाते हैं। अगर सांप नहीं होंगे तो चूहों की आबादी बढ़ेगी जो खतरनाक होगा।
जब आप सांप को देखें तो चुप रहें, शोर न करें। स्नेक कैचर एक्सपर्ट की मदद लें। सांपों को मारने के बारे में मत सोचो।
शाम से रात तक झाड़ियों और घने जंगल में जाने से बचें। जरूरत पड़ने पर टॉर्च का इस्तेमाल करें। जूते का प्रयोग करें।
सांप के काटने पर ये करें
जहां सांप ने काटा हो वहां मालिश न करें। प्रभावित क्षेत्र को साबुन और साफ पानी से धोएं।
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- तुरंत नजदीकी अस्पताल में दिखाएं। एंटी-टॉक्सिन दवाएं लें।