जिस मंशा के अनुरूप भोपाल में आठ वर्ष पहले गिद्ध प्रजनन केंद्र की नींव रखी थी वह अधूरी है। इस केंद्र में 61 गिद्ध हैं इन पर 8 वर्ष में करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। तब भी 10 की मौत हो चुकी है। आगे किसी कि मौत् न हो इसके पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। गिद्धों के अंडों से चूजे निकालने के लिए एक कृत्रिम इंक्यूबेशन सेंटर बना लिया गया है। यह अगले दो महीने में चालू कर दिया जाएगा। यह देश का पांचवा गिद्ध प्रजनन केंद्र हैं जिसे गिद्धों को बचाने के लिए खोला गया है। यह केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधीन है और वन विहार नेशनल पार्क इसका संचालन करता है। 

भारत में गिद्ध संकटग्रस्त की श्रेणी में शामिल है। राज्य में इसके संरक्षण पर कोशिशें जारी हैं। गिद्धों की संख्या बढ़ने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन हकीकत में गांवों के नजदीक मृत मवेशियों को खाने पहुंचने वाले गिद्धों की वापसी नहीं हुई है। अब ये गिद्ध प्रजनन केंद्र राज्य में इनकी संख्या कितनी बढ़ा सकते हैं यह भविष्य ही बताएगा। फिलहाल मेंडोरा जंगल में मौजूद गिद्ध प्रजनन केंद्र में 7 नए गिद्धों के बच्चों ने जन्म लिया है। इनका जन्म रखने के लिए पूर्व से दो एवियरी व चार होल्डिंग एवियरी थी। अब तीसरी एवियरी भी बना दी है। एवियरी में वयस्क गिद्ध व होल्डिंग एवियरी में गिद्ध के बच्चों को रखा जाता है।

एमओईएफ ने बीते वर्ष दी थी सहमति:

उल्लेखनीय है कि 2014 में भोपाल के गिद्ध प्रजनन केंद्र की शुरुआत की थी तब यह देश का दूसरा केंद्र था पहला केंद्र हरियाणा के पिंजोरा का था जिसमें उस समय 127 गिद्ध थे। बीते वर्ष एमओईएफ ने पाच राज्यों में इक्यूबेशन सेंटर खोलने की सहमति दी थी उसी के तहत भोपाल के केंद्र में उक्त इकाई को तैयार कर लिया है। वर्ष 2020-21 में हुए आकलन के अनुसार मप्र के खुले जंगल में 9446 गिद्ध है, ये खुले जंगलों में जीवन यापन कर रहे हैं। पार्क प्रबंधन के अधिकारियों का कहना है कि इस केंद्र में हरियाणा के पिंजोर से 23 जोड़े और पचमढ़ी के तामिया से छह गिद्ध लाए थे ये अप्रैल 2014 के बाद लाए थे। तब से लेकर अब तक इनके बीच 21 बच्ची का जन्म हुआ। इनमें से नए व पुराने 10 गिद्धों की मौत हो गई। वर्तमान में 6 गिद्ध प्रजनन केंद्र में जीवन यापन कर रहे हैं।

मप्र के जंगल में कब कितने गिद्ध मिले

  • वर्ष 2016 में 6900
  • वर्ष 2017 में 7000
  • वर्ष 2019 में 7900
  • वर्ष 2021 में 9446