दिसम्बर 84 के यूनियन कार्बाइड हादसे के पीड़ितों के  बीच काम कर रहे संगठनों ने  हाल के भोपाल जिला अदालत के सत्र न्यायालय के फैसले से उम्मीद जागी है  कि 2010 से यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (UCIL) और उसके 7 भारतीय अधिकारियों के खिलाफ लबित कार्यवाही का जल्दी अंत होगा |  25 मार्च को इस मामले में सुनवाई करते हुए सत्र न्यायालय के  न्यायाधीश ने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड और उसके दोषी अधिकारियों के कहने पर और समय की मोहलत दी गई एवं आदेशित किया कि अप्रैल 25 -29 2022 को वह सभी अपनी अंतिम दलीले पेश करे और 24 मई को मामले में अंतिम निर्णय के लिए रखा जाएगा |
 
यूनियन कार्बाइ इंडिया लिमिटेड और उसके दोषी अधिकारीयों द्वारा अपनाई गई देरी की रणनीति ने यह सुनिश्चित किया है कि अगस्त 2021 से सत्र न्यायालय में लंबित अपील की योग्यता पर कोई बहस नहीं हो पाई है | हर पेशी पर अभियुक्तों द्वारा एक नया बहाना पेश किया गया है | अभियोजन CBI द्वारा न्यायालय के समक्ष 25 मार्च 2022 को अपने आवेदन में बताया कि 2010 से यह आपराधिक अपील इस माननीय न्यायालय के समक्ष लंबित है और किसी भी उच्च न्यायालय का कोई आदेश नहीं है जो इस अपील कार्यवाही को रोकने के लिए आदेशित करता हो | अभियुक्तो द्वारा बार बार अगली तारीख मांगने की याचिका दायर करके कानून की उचित प्रक्रिया को पटरी से उतारने और न्याय प्रक्रिया में अत्यधिक देरी करने के प्रयास किए जा रहे है । "यह आपराधिक अपील 11 साल से लंबित है और इसी दौरान 2 दोषी अधिकारी (केवी शेट्टी, विजय गोखले) अपने अपराधों का भुगतान किए बिना ही दिवंगत हो चुके हैं और बाकी दोषी अधिकारी पेशी पर भी शामिल नहीं होते हैं" , कहती है भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा

नवम्बर 2021 में यू सी आई एल के 3 दोषी अधिकारियों  (किशोर कामदार -पूर्व अध्यक्ष , जे. मुकुंद -वर्क्स मैनेजर और एस.पी. चौधरी) ने वर्तमान सत्र न्यायालय के न्यायाधीश को इस मामले से हटाने की मांग की क्योंकि उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी के मुआवजे प्राधिकरण में 1997 में प्रशासनिक भूमिका में काम किया था | जिला न्यायाधीश ने इस अर्जी को खारिज कर दिया और इन तीनो अभियुक्तों द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई | 30 नवम्बर 2021 को म. प्र. उच्च न्यायालय ने पाया की अभियुक्तों की याचिका में कोई योग्यता नहीं थी और जिला न्यायाधीश को मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करने के लिए आदेशित किया | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए लिए इन तीनो अभियुक्तों द्वारा 20 जनवरी 2022 को सर्वोच्च न्यायायलय में SLP याचिका दायर की गई |  यूनियन कार्बाइड के दोषी अधिकारियों का यह तर्क है कि उनके द्वारा भोपाल के सत्र न्यायालय में दायर आपराधिक अपील पर तब तक सुनवाई नहीं की जानी चाहिए जब तक कि जिला न्यायाधीश को अलग करने के संबंध में उनके एसएलपी मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं हो जाता।

7 जून 2010 को भोपाल जिला अदालत के  न्यायिक मजिस्ट्रेट ने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल), केशव महिंद्रा सहित उसके 7 भारतीय अधिकारियों को धारा 304-ए, 336, 337, 338 और 35 आईपीसी के तहत दोषी ठहराया गया । यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड और उसके भारतीय अधिकारियों द्वारा इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई थी और तब से यह मामला भोपाल जिला न्यायालय की सत्र अदालत में लंबित है। "दुनिया की भीषणतम औद्योगिक हादसे के 37 साल बाद, भोपाल के 25,000 लोगो को मारने और 5 लाख लोगो को घायल करने के लिए जिम्मेदार कंपनियों और अधिकारियों ने आपराधिक अपील की कार्यवाही में देरी के लिए पुस्तक में हर देरी की रणनीति का इस्तेमाल किया है। हालांकि दोषी अधिकारियों आज भी आजाद घूम रहे है और भोपाल गैस पीड़ित गैस जनित बीमारियों से झूझते हुए असमय मौत मर रहे है | इन्साफ में देरी -इन्साफ से वंचित करने का बेहतर उदहारण दुनिया में और कहीं नहीं मिलेगा, कहती है भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा की शहजादी बी

भोपाल जिला अदालत में विदेशी कंपनियों यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन-यूएसए और डॉव केमिकल के खिलाफ लंबित आपराधिक प्रकरण में, भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन (सीबीआई, अभियोजन की सहायता करने वाला एनजीओ) ने एक आवेदन दायर किया और डॉव केमिकल अमरीका के अधिकृत प्रतिनिधि का विवरण प्रदान किया, जिसे उपस्थिति के लिए नोटिस दिया जाना चाहिए। इससे पहले द डाव केमिकल कंपनी को भोपाल जिला अदालत में पेश होने के लिए छह नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अभियोजन एजेंसी, सीबीआई को डॉव केमिकल के अधिकृत प्रतिनिधि के विवरण को सत्यापित करने और 25 अप्रैल, 2022 को होने वाली अगली सुनवाई में अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करने के लिए आदेशित किया है।