दोपहर मेट्रो, भोपाल टीबी की जांच कराने के लिए मरीजों को शहर में ज्यादा दूर नहीं जाना होगा न ही उन्हें जांच के लिए इंतजार करना पड़ेगा। जांच की सुविधा बढ़ाने के लिए भोपाल में पांच ट्रूनेट मशीनें लगाई जाएंगी। इन्हें लगाने का काम महीने भर के भीतर पूरा हो जाएगा। इन्हें छोटे अस्पतालों जैसे बैरागढ़ सिविल अस्पताल, सीएचसी गांधी नगर, कोलार में लगाया जाएगा। बाकी दो मशीनें लगाने के लिए अस्पताल अभी तय नहीं हो पाए हैं। पहले से सिर्फ जेपी अस्पताल में एक मशीन लगी है। इन मशीनों से किसी भी अंग के टीबी की जांच की जा सकती हैं। तीन घंटे के भीतर रिपोर्ट भी मिल जाती है।
टूनेट मशीनें चलेंगी:
जिला क्षय अधिकारी डॉ. मनोज वर्मा ने बताया कि ट्रूनेट मशीनों में बैटरी लगी हुई है। बिजली जाने पर भी यह चलती रहती हैं। एक मशीन से एक समय में दो सैंपलों की जांच की जा सकती है। इससे बलगम के साथ ही शरीर की उन सभी तरल चीजों की
जांच हो सकेगी जिनसे टीबी का पता चलता है। एक बार टीबी की पुष्टि होने के बाद यह पता लगाने के लिए दोबारा जांच की जाती है कि मल्टी ड्रग रजिस्टेंस टीबी तो नहीं है।
शोपीस बनी सीबी नेट मशीनें, जांच किट नहीं आ रही:
टीबी की जांच के लिए हमीदिया, एम्स, बीएमएचआरसी, टीबी अस्पताल और और जिला क्षय केंद्र में कार्टेज बेस्ड न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (सीबीनेट) मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन जांच के लिए पर्याप्त कार्टेज नहीं मिलने की वजह से मशीने शोपीस बनी हुई हैं। महीने में 500 से 1000 कार्टेज ही मिल पा रही हैं। इसमें एक साथ चार सैंपलों की जांच की जा सकती है।