जीएन साईंबाबा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार 15 अक्टूबर को एक विशेष सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के 14 अक्टूबर के आदेश पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक जीएन साईबाबा को फिलहाल जेल में ही रहना है। 

इससे पहले, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईंबाबा और अन्य को कथित माओवादी लिंक के एक मामले में बरी कर दिया और उनकी रिहाई का आदेश दे दिया था। अब इस मामले में अगली सुनवाई 8 दिसंबर के बाद होगी।

आपको बता दें कि जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने महाराष्ट्र राज्य की अपील पर नोटिस जारी कर यह आदेश जारी किया है, अदालत ने आदेश देते हुए कहा, "हमारा दृढ़ मत है कि उच्च न्यायालय के आक्षेपित निर्णय को निरस्त करने की आवश्यकता है... सीआरपीसी की धारा 390 और 1976 के मामले में इस न्यायालय का निर्णय विवादित नहीं है। (3 ) SCC 1 पर भी विचार किया जा रहा है। हालाँकि, यह न्यायालय उच्च न्यायालय के आदेश को निलंबित कर सकता है।"

पीठ ने कहा कि साईंबाबा, जो दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे, उनको निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने तथ्यों को देखे बिना उन्हें तकनीकी आधार पर बरी कर दिया। उच्च न्यायालय ने माना कि यूएपीए को उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना आगे बढ़ने की अनुमति दी गई थी।