महाराष्ट्र पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के ज्यादातर विधायकों ने बगावत कर दी है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने गुरुवार को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार को 30 जून को सुबह 11 बजे फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया। जिसके बाद शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
#BREAKING | महाराष्ट्र में कल ही होगा फ़्लोर टेस्ट #Khabardar #MaharashtraPolitcalCrisis #Politics #Maharashtra | @SwetaSinghAT @mewatisanjoo pic.twitter.com/SaJqXc4NFB
— AajTak (@aajtak) June 29, 2022
जिसका ट्रायल पूरा हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने रात 9 बजे अपना फैसला सुनाया। उद्धव ठाकरे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। ऐसे में महाविकास अघाड़ी सरकार को कल यानि शुक्रवार को सुबह 11 बजे फ्लोर टेस्ट का सामना करना पड़ेगा।
जानिए क्या कुछ हुआ कोर्ट में..!
1. महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट को लेकर सभी पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट रात 9 बजे अपना फैसला सुनाएगा।
2. इस पूरे मामले में अभिषेक मनु सिंघवी ने शिवसेना का साथ दिया। एकनाथ शिंदे समूह की ओर से नीरज किशन कौल ने अदालत में तर्क दिया।
3. शिवसेना ने अदालत में कहा था कि वर्तमान में फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकता क्योंकि बागी विधायकों पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
4. ऐसे में अगर फ्लोर टेस्ट होता है तो बागी विधायकों के वोटों की भी गिनती होगी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में सभी पक्षों ने तीखी दलीलें दी।
सॉलिसिटर जनरल की सुप्रीम कोर्ट में दलील-
1. सॉलिसिटर जनरल की दलील सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो गई है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपना तर्क पेश किया।
2. तुषार मेहता का कहना है कि राज्यपाल का फैसला गलत नहीं है। स्पीकर अपनी वोटर लिस्ट खुद तय नहीं कर सकता। डिप्टी स्पीकर पर पहले से ही अविश्वास प्रस्ताव की बात कर चुके है।
3. उपसभापति ने सदस्यता रद्द करने के लिए खुद दो दिन का समय दिया। लोकतंत्र में बहुमत का फैसला फ्लोर टेस्ट से ही संभव है। कई निर्णयों में न्यायालय द्वारा 24 घंटों के भीतर फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया जाता है। अब डिप्टी स्पीकर कह रहे हैं, 24 घंटे में फैसला क्यों? दूसरी ओर, फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले मुंबई में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। डीसीपी रैंक के 20 अधिकारियों को लगाया गया है।
शिंदे समूह के वकील की दलील-
1. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि असंतुष्ट समूह के कितने सदस्य हैं। कौल ने जवाब दिया कि 55 में से 39 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। असंतुष्ट समूह ने कहा हम असली शिवसैनिक हैं, क्योंकि हमारे पास बहुमत है।
2. उन्होंने कहा कि फ्लोर टेस्ट से बचने के लिए अदालत बुलाई है। शिवसेना के पास सिर्फ 16 विधायक हैं, जबकि हमारे पास 39 विधायक हैं। हमारे पास बहुमत है।
3. नीरज किशन कौल ने एमपी (2020) का सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। कौल ने तर्क दिया कि जब तक आप फ्लोर टेस्ट में देरी करते हैं, लोकतंत्र को सबसे ज्यादा नुकसान होता है।
4. शिंदे के वकील नीरज किशन कौल ने कहा कि राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट का फैसला सोच-समझकर लिया है। उद्धव ठाकरे के पास बहुमत नहीं है, लेकिन उनके पास है।
5. उद्धव पद से हटना नहीं चाहते है। अगर उनके पास पर्याप्त ताकत है, तो आप जीतेंगे। अगर वह नहीं जीत सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
6. नीरज किशन कौल ने कोर्ट में कहा कि फ्लोर टेस्ट में देरी नहीं होनी चाहिए। अयोग्यता, कार्यवाही या विधायकों के इस्तीफे से फ्लोर टेस्ट में विलंब आधार नहीं हो सकता है। खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए जल्द फ्लोर टेस्ट कराया जाए। सबसे पहले यह तय किया जाना चाहिए कि अध्यक्ष को हटाया जाए या नहीं?
शिवसेना के वकील की दलील-
1. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सदस्यों की अयोग्यता का मामला जहां सुप्रीम कोर्ट में लंबित है वहीं अगले दिन कोरोना से ठीक हुए राज्यपाल विपक्ष के नेता से मुलाकात के बाद कोई फ्लोर टेस्ट की मांग कैसे कर सकता है?
2. सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, 'हमारा मानना है कि बहुमत का फैसला सिर्फ सदन में ही लिया जा सकता है।
3. यानी अयोग्य विधायकों पर फैसला आने से पहले फ्लोर टेस्ट कैसे किया जा सकता है?
4. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, हमारे पास अयोग्यता का मामला लंबित है, लेकिन इसका फ्लोर टेस्ट से क्या लेना-देना है, कृपया स्पष्ट करें। सिंघवी ने जवाब में कहा कि, एक तरफ, सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्यता कार्यवाही पर रोक लगा दी है। दूसरी ओर विधायक कल मतदान कर रहे हैं, जो एक विरोधाभास है।
5. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 6 महीने में दोबारा फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकता। राज्यपाल ने पूरे मामले में तेजी से कार्रवाई की है। पहली अयोग्यता लेकर निर्णय लेना चाहिए। स्पीकर के फैसले से पहले फ्लोर टेस्ट नहीं होना चाहिए।
6. शिवसेना के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों पर शीर्ष अदालत ने कहा कि डिप्टी स्पीकर की उपयुक्तता भी सवालों के घेरे में है। जिसका मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
7. क्या नोटिस लाया गया है? हम उस पर फैसला करेंगे। पीठ ने सवाल पूछा, क्या री-फ्लोर टेस्ट की कोई समय सीमा है?