राजस्थान कांग्रेस का जिक्र आते ही अशोक गहलोत V/S सचिन पायलट की सियासी गूंज सुनाई देने लग जाती है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के समय गहलोत V/S पायलट की राजनीतिक खींचतान अब एक बार फिर खबरों की सुर्ख़िया बन गई है।
माज़रा चार महीने पुराना याने सितंबर 2022 का है। कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर कई नामों पर चर्चा चल रही थी। इसमें सीएम अशोक गहलोत का नाम भी शामिल था। गहलोत का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए लगभग तय हो चुका था। मामला उस समय बेपटरी हो गया जब अशोक गहलोत सीएम पद से इस्तीफा नहीं देने पर अड़ गए।
दूसरी तरफ सचिन पायलट इस मौके पर नज़र लगाए बैठे थे कि अशोक गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और मुख्यमंत्री पद पर उनकी ताजपोशी हो। इन सबके बीच राजस्थान की सियासत भी डगमगाने लगी थी क्योंकि कांग्रेस ने पायलट के नाम पर हरी झंडी दिखाई तो गहलोत ने विधायकों के समर्थन का दावा कर शक्ति प्रदर्शन तक कर दिया था।
बढ़ती सियासत और डगमगाती सरकार की हालत को देख कई विचारों पर मंथन के लिए कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी। बता दें कि 25 सितंबर 2022 को गहलोत समर्थक 81 विधायकों ने गहलोत के उत्तराधिकारी का निर्धारण करने के लिए बुलाई गई विधायक दल की बैठक को विफल करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।
अचानक हुए इस घटनाक्रम से कांग्रेस आलाकमान तक सकते में आ गया था। इसके बाद पायलट गुट की तुलना में गहलोत गुट का पलड़ा भारी होने के कारण पर्यवेक्षकों को नाराज होकर वापस दिल्ली जाना पड़ा था क्योंकि पर्यवेक्षक सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के लिए आये थे लेकिन गहलोत की बगावत से कांग्रेस की किरकिरी होने के बाद शशि थरूर, मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम अध्यक्ष की रेस में आगे हो गया।
विधानसभा सचिव ने HC को दी जानकारी-
फ़िलहाल, इन सब के बीच गहलोत समर्थक 81 विधायकों के इस्तीफ़े को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए जो इस्तीफों का दौर चला था उसके अब नए तथ्य सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, विधानसभा सचिव की तरफ से हाईकोर्ट में कहा गया है कि 81 विधायकों के इस्तीफे “स्वैच्छिक” नहीं थे। इसमें सिर्फ छह विधायकों ने खुद पेश होकर 81 विधायकों के इस्तीफे दिए थे। इसलिए सभी विधायकों के इस्तीफ़े मंजूर नहीं किया गए थे।
इस खुलासे के बाद बड़ा सवाल तो यही है कि क्या अशोक गहलोत विधायकों के समर्थन का जो दावा कर रहे थे और उनके साथ विधायकों की जो बड़ी संख्या प्रचारित की गई थी हकीकत उससे कोसों दूर थी। अब जब कि सचिन पायलट राजस्थान की सड़कों पर उतर चुके हैं तो कांग्रेस उन्हें क्या राजस्थान सीएम बना सकती हैं? क्योंकि गहलोत की बग़ावत के पीछें समर्थन की जो थ्योरी थी अब उसका राज खुल चुका है।
ऐसे में यह कयास लगाया जा रहा हैं कि इस खुलासे से विधानसभा का रास्ता सचिन पायलट के लिए साफ हो गया है और भारत जोड़ो यात्रा भी समाप्त हो चुकी है। इसलिए कांग्रेस नेतृत्व कोई बड़ा एलान कर सचिन पायलट को राजस्थान में अपना भविष्य घोषित कर सकती है।