देश के ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले की भारी किल्लत से उत्पन्न बिजली संकट के समाधान के लिए सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर मंत्रियों की आपात बैठक हो रही है। जानकारी के अनुसार, बैठक में ऊर्जा मंत्री आर.के सिंह, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी के अलावा अगल-अलग मंत्रालयों के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
देश के ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले की भारी कमी के कारण बिजली संकट के बीच पीक आवर्स में आपूर्ति ठप हों रही है।जहां एक सप्ताह पहले 25 अप्रैल को बिजली की कमी 5.24 गीगावाट थी, वहीं गुरुवार को यह बढ़कर 10.77 गीगावाट हों गई।
बिजली की मांग अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुचीं-
नेशनल ग्रिड ऑपरेटर, पावर सिस्टम ऑपरेशंस कॉरपोरेशन (POSOCO) के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि रविवार को पीक ऑवर्स केवल 2.64 GW था, जबकि पिछले सोमवार को 5.24 GW, मंगलवार को 8.22 GW, बुधवार को 10.29 GW और गुरुवार को 10.77 GW था। 29 अप्रैल, 2022 को बिजली की अधिकतम मांग 207.11 गीगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। नतीजतन शुक्रवार को बिजली की कमी 8.12 गीगावाट हों गई थी।
अप्रैल के अंतिम सप्ताह में रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति-
वहीं यह भी कहा जा रहा है कि, देशभर में भीषण गर्मी के चलते इस सप्ताह में तीन बार बिजली आपूर्ति रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। पीक बिजली की मांग मंगलवार को रिकॉर्ड 201.65 गीगावाट पर पहुंच गई। 7 जुलाई, 2021 को यह 200.53 गीगावॉट थी। गुरुवार को अधिकतम बिजली की मांग 204.65 गीगावॉट के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर थी और शुक्रवार को 207.11 गीगावॉट के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। सिर्फ़ बुधवार को यह 200.65 गीगावॉट थी।
बढ़ती मांग से बढ़ा बिजली संकट-
जानकारों का कहना है कि, बिजली की मांग बढ़ने से देश में बिजली संकट और गहरा हों गया हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के नेतृत्व में सभी हितधारकों को थर्मल पावर प्लांट में कम कोयले के भंडार, परियोजना पर रैक को तेजी से खाली करने और इसकी उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। जानकारों के अनुसार, मई और जून में ही स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है, क्योंकि यह गर्मी की शुरुआत हैं। ऊर्जा मंत्रालय ने कहा, मई-जून 2022 में बिजली की मांग करीब 215-220 गीगावाट तक पहुंच सकती है।