दो बार की चैपिंयन वेस्टइंडीज बेआबरू होकर टी-20 वर्ल्ड कप से बाहर हो गई। सितारों से सजी वेस्टइंडीज क्वालीफायर राउंड में ही असोसिएट देशों आयरलैंड और स्काॅटलैंड से हारकर घर लौटने को मजबूर है। टीम को केवल जिम्बाब्वे पर ही जीत मिली।
साल 2012 और 2016 में विश्वकप का खिताब जीतने वाली वेस्टइंडीज टीम के क्वालीफायर राउंड में बाहर होने से उसके प्रशंसक बेहद नाराज हैं। हालांकि कप्तान निकोलस पूरन ने टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के लिए प्रशंसकों से माफी मांगी है।
सोशल मीडिया में यह सवाल उठ रहा है कि आईपीएल समेत पूरी दुनिया की टी-20 लीग में अपने धमाकेदार प्रदर्शन से मोटी रकम कमाने वाले खिलाडियों की इस टीम की दयनीय दशा का जिम्मेदार कौन है? दुनिया भर की लीग क्रिकेट को प्राथमिकता दिए जाने से टीम के स्टार प्लेयर या तो चोटिल होकर विश्वकप की टीम का हिस्सा नहीं बन सके या अन्य निजी कारणों से चयन के लिए उपलब्ध नहीं हुए।
कैरन पोलार्ड, आंद्रे रसल, सुनील नरेन और शिरमान हेटमायर के बिना वेस्टइंडीज टी-20 वर्ल्ड कप में दोयम दर्जे की टीम नजर आई। बड़ी बात यह है कि टी-20 के बड़े स्टार्स होने के बाद भी वेस्ट इंडीज़ को क्वालीफायर राउंड में खेलना पड़ा और वहां भी निराशाजनक प्रदर्शन कर टीम प्रतियोगिता से बाहर हो गई।
कप्तान निकोलन पूरन भी लंबे समय से रनों के लिए जूझते दिखाई दे रहे हैं। क्वालीफायर राउंड के तीन मैचों में भी उनका बल्ला शांत रहा और कमजोर कही जाने वाली आयरलैंड, स्काॅटलैंड और जिम्बाब्वे के खिलाफ भी वे तीन मुकाबलों में कुल 25 रन ही बना सके।
टीम के दूसरे अनुभवी खिलाडी जेसन होल्डर ने गेंदबाजी में जरूर अपनी उपयोगिता दिखाई लेकिन बतौर बल्लेबाज वे नाकाम रहे। यही हाल टाॅप ऑर्डर के विस्फोटक बल्लेबाजों इविन लुईस और जोनाथन चार्ल्स का हुआ। ब्रेंडन किंग ने तीसरे मैच में पचासा जरूर जड़ा लेकिन यह पचासा जीत दिलाने में कामयाब नहीं हुआ।
कैरेबियाई टी-20 लीग में अपने प्रदर्शन से हीरो साबित हुए कायले मेयर्स और रामवन पाॅवेल जब देश के लिए खेलने उतरे तो बुरी तरह असफल साबित हुए जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। कुल मिलाकर दुनिया भर की लीग क्रिकेट में जलवा दिखने वाले सूरमा खिलाड़ियों ने वेस्ट इंडीज क्रिकेट की नाक कटवा दी है।