पश्चिम बंगाल के बीरभूम में हुई कथित हिंसा का मुद्दा शुक्रवार को राज्यसभा में उठा, पहले सदन की कार्यवाही 11.10 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। उसके बाद भाजपा की सांसद रूपा गांगुली ने शून्यकाल के तहत मुद्दा उठाया और भावुक हो गईं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। बंगाल हिंसा का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि, पश्चिम बंगाल में लोग जीने लायक नहीं रह गए हैं, वहां एक-एक कर के लोग भाग रहे हैं, हमें बंगाल में राष्ट्रपति शासन चाहिए और हमने बंगाल में जन्म लेकर कोई अपराध नहीं किया है। 

आग ने सब कुछ नष्ट कर दिया : रूपा गांगुली

भाजपा सांसद रूपा गांगुली ने आगे कहा कि, जो लोग पश्चिम बंगाल में बोल नहीं पा रहे वे लोग क्या अंदर ही अंदर रो नहीं रहे होंगें ? पश्चिम बंगाल की सरकार हत्यारों की रक्षा करती है। वहां हर दिन दिनदहाड़े गोलियों की आवाज़ सुनाई देती है। ऐसा कोई राज्य नहीं जहां जीते हुए लोगों को सरकार पकड़-पकड़ कर मारती हो.! पश्चिम बंगाल के बीरभूम में 8 लोगों को जलाकर मार दिया गया। वहां लोगों को पुलिस पर भरोसा नहीं है। वहां आज लोग पलायन करने पर मजबूर हैं। पिछले 7 दिनों में बंगाल में 26 लोगों की राजनीतिक हत्याएं हुई हैं।

टीएमसी सदस्य भड़क गए :

राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने इसका जोरदार विरोध किया और हंगामा शुरू हो गया। इस दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य आपस में भिड़ गए। हंगामे के बीच उपराष्ट्रपति हरिवंश ने विशेष उल्लेख के तहत जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए दूसरे दल की ममता मोहंती का नाम लिया। हंगामे के बीच ममता ने अपना मुद्दा उठाया लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी। उपाध्यक्ष ने सदस्यों से शांत रहने की अपील की। उनकी बातों का असर न देखकर उन्होंने कार्यवाही स्थगित कर दी।