एमपी मिशन-2023 से पहले बीजेपी ‘विकास यात्रा’ के ज़रिये अपने कामों की उपलब्धि गिनाने के लिए हर इलाके में पहुंच रहीं है. इस दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक और कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त जसवंत जाटव शिवराज सरकार के विकास कार्य गिनाते-गिनाते सीधे भ्रष्टाचार की कहानी बताने लगे. फिर क्या सिस्टम की पोल खुलना तो तय ही था.

बता दें कि शिवपुरी जिले में विकास यात्रा को संबोधित करते हुए जसवंत जाटव बोले, 'राजस्व विभाग में तहसीलदार- एसडीएम हो या इनके नीचे आरआई- पटवारी यह महत्वपूर्ण अंग है. मैं पूरी गारंटी के साथ कह सकता हूं कि हमारी दोनों तहसील में कोई भी नामांतरण कोई भी बंटवारा बिना सुविधा शुल्क के नहीं हो रहा है. मेरे क्षेत्र का व्यक्ति पटवारियों-आरआई के सामने गिड़गिड़ा रहा है, जैसे वह भीख मांग रहा हो..! यह भ्रष्टाचार बंद होना चाहिए, अगर किसी को भ्रष्टाचार पसंद है वो यहां से ट्रांसफर करा लें. एक भी शिकायत मिलेगी तो मैं ऐसे ही मंच से बेइज्जत कराऊंगा और जनता द्वारा कराउंगा.'

कांग्रेस का तंज- खुद कितने में बिके?

अक्सर भ्रष्टाचार की कहानी फाइलों तक ही सीमित रहती हैं लेकिन अगर ये सियासी मंच से सुनाई दे जाए तो फिर उसकी गूंज दूर तक ही जाती है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर इस समय सियासी माहौल तो काफी गर्म है ही इस बीच जसवंत जाटव के इस बयान ने विपक्ष को एक और मौक़ा दे दिया.

फिर चाहे कांग्रेस 'हाथ से हाथ जोड़ो' अभियान में लगी हो लेकिन वह कहां चुनावी साल में कोई मौका छोड़ने वाली थी. कमलनाथ के मीडिया सलाहकार पीयूष बबेले ने ट्वीट करते हुए पूछा कि 'कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त जसवंत जाटव के मुंह से सुनिए शिवराज सरकार के भ्रष्टाचार के काले कारनामे, एसडीएम-तहसीलदार-पटवारी सबके रेट फिक्स है. मंत्री ने बस यह नहीं बताया कि वे खुद कितने में बिके थे? जब कांग्रेस सरकार गिराई थी.'

इस ट्वीट के मायने समझे तो कांग्रेस एक तीर से दो निशाना लगाते हुए न सिर्फ बीजेपी बल्कि कमलनाथ सरकार गिराने वाले सिंधिया समर्थकों को भी घेरने के प्रयास में जुट गई हैं. चुनावी मौसम नजदीक आते ही कांग्रेस 'हाथ से हाथ जोड़ों’ यात्रा निकालकर बीजेपी सरकार की कथनी और करनी बता रही है. तो वहीं बीजेपी पांच फरवरी से 'विकास यात्रा' निकालकर अपने कामों को गिना रहीं है. ऐसे में नेताओं के बेतुके बयान से सियासत का गरमाना तो तय ही हैं.