सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को लेकर एक मामले में बड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है, कि अगर पत्नी शादी को बरकरार रखना चाहती है और पति शादी को ख़त्म करना चाहता है, तो ऐसे में पति की शादी को ख़त्म करने की याचिका अनुच्छेद 142 के तहत रद्द कर दी जाएगी, वो अपनी शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकेगा।

कोर्ट ने साफ-साफ शब्दों में कहा है, कि अगर पति-पत्नी में से एक पक्ष शादी को ख़त्म करने को लेकर राजी नहीं है तो आर्टिकल 142 के तहत उन्हें तलाक नहीं मिल सकता। इतना ही नहीं, कोर्ट ने ये भी कहा कि हमने अभी तक शादी को लेकरह तलाक के पश्चिमी मानकों को नहीं अपनाया है।

तलाक के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि भारत में शादी कोई कैजुअल इवेंट नहीं है। कपल को समक्षाइश देते हुए कोर्ट ने कहा आप दोनों काफी शिक्षित हैं और पश्चिमी दृष्टिकोण को अपना सकते हैं। मगर जब तक कि तलाक के लिए एक पक्ष तैयार नहीं है, तब तक आर्टिकल 142 के तहत इस शादी को रद्द नहीं किया जा सकता। इसे ख़त्म करने के लिए हम अपनी शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकते।