अडाणी ग्रुप ने उसके खिलाफ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट को बेसलेस बताया है। अडाणी ग्रुप ने कहा कि उसकी मार्केट वैल्यू को कम करने और प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए एफटी लगातार कैंपेन चला रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में अडाणी ग्रुप पर कोयला इंपोर्ट में ओवर- इनवॉइसिंग का आरोप लगाया था। अडाणी ग्रुप ने कहा कि स्थित अखबार पहले भी अपने प्रयासों में विफल रहा था और अब अडानी ग्रुप को वित्तीय रूप से अस्थिर करने का एक और प्रयास कर रहा है। 

एक बार फिर कोयला इंपोर्ट में ओवर इन्वॉयसिंग के पुराने और आधारहीन आरोपों को रीसाइकिल कर रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की स्टोरी डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस के 30 मार्च 2016 के सर्कुलर पर आधारित है। फाइनेंशियल टाइम्स का एजेंडा इस तथ्य से उजागर होता है कि जिस सर्कुलर पर ये स्टोरी आधारित है, उसमें अडाणी समेत 40 दूसरे इंपोर्टर्स के भी नाम हैं, मगर एफटी ने सिर्फ अडाणी ग्रुप पर आरोप लगाए हैं। इसमें रिलायंस इंफा, स्टील और एस्सार ग्रुप के अलावा कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु जैसे कई राज्य सरकारों की बिजली बनाने वाली कंपनियों के भी नाम हैं। ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोटिंग प्रोजेक्ट के साथ हाथ मिलाया है। जॉर्ज सोरोस की संस्था है। 31 अगस्त 2023 को भी ग्रुप के खिलाफ निराधार स्टोरी पब्लिश की थी।

अडाणी ग्रुप पर 31 अगस्त को एक और विदेशी रिपोर्ट सामने आने के बाद कंपनी के 10 शेयर में से 9 में गिरावट देखने को मिली। ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोटिंग प्रोजेक्ट में दावा किया गया है कि अडाणी ग्रुप के निवेशकों ने गुपचुप तरीके से खुद अपने शेयरों को खरीदकर बाजार में लाखों डॉलर का निवेश किया।