रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड यानी आरआईएल का फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट लिमिटेड 20 जुलाई को डीमर्जर यानी अलग हो जाएगा। मीडिया रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी के हवाले से बताया जा रहा है कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की वैल्यू 1.52 लाख करोड़ रुपए से अधिक होगी। डीमर्जर के साथ ही यह भारत की पांचवीं सबसे बड़ी फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी बन जाएगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास पहले से ही एक NBFC लाइसेंस है।
रिलायंस के शेयर होल्डर्स पर क्या असर होगा ?
कंपनी ने जानकारी देते हुए बताया है कि डीमर्जर के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर होल्डर्स को हर एक शेयर के बदले जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के एक शेयर मिलेंगे। हालांकि, शेयर होल्डर्स के डीमैट अकाउंट में फाइनेंशियल सर्विसेज के स्टॉक कब क्रेडिट होंगे और मार्केट में कब से ट्रेड होंगे इसके बारे में कंपनी ने अभी तक किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी है।
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का प्लान कंज्यूमर और मर्चेंट लैंडिंग बिजनेस शुरू करने का है। ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की दिग्गज कंपनी मैक्वेरी ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में रिलायंस के फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस को मार्केट ग्रोथ के मामले में पेटीएम और अन्य फिनटेक कंपनियों के लिए एक बड़ा खतरा बताया था।