मौजूदा समय में अमेरिका सहित लगभग तमाम विकसित देशों के शेयर बाजार में बिकवाली का दौर जारी है। उतार-चढ़ाव के साथ- साथ शेयर बाजार गोते भी लगा रहा है। लेकिन भारतीय बाजार गुलजार हो रहे हैं और विदेशी निवेशकों की रूचि लगातार बढ़ा रहे हैं। इससे चीन की हालत खराब हो रही है क्योंकि उसका बाजार ठंडा है और निवेशकों को चीन से मोहभंग नजर आ रहा है।

दरअसल महामारी, भू- राजनीतिक संकट, रूस- यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमत की वजह से विकसित देशों में शेयर बाजार की हालत खस्ता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी नरमी बनी हुई है। कुछ देशों में मंदी आने के आसार बने हुए हैं। मगर इसके ठीक उलट भारतीय शेयर बाजार में विगत कुछ महीनों से उछाल की स्थिति है।

जानकारों के अनुसार, इस साल के अंत तक सेंसेक्स 70,000 के स्तर पर पहुंच सकता है। उछाल की स्थिति बने रहने की वजह से पिछले तीन महीनों में शेयर बाजार के निवेशकों की संपत्ति में 40 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।

विदेशी निवेशकों ने 47 हजार करोड़ रुपए का किया था निवेश

शेयर बाजार में उछाल का कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) द्वारा ज्यादा निवेश करना है। इसमें अमेरिका और यूरोप के निवेशकों की संख्या अधिक है। जून में विदेशी निवेशकों ने भारत में 47 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया था। इससे चीन की परेशानी बढ़ रही है, क्योंकि चीन का बाजार कम निवेश होने से ठंडा पड़ता जा रहा है वर्ष 2025 तक भारतीय अर्थव्यवस्था के 30 खरब डॉलर से 50 खरब डॉलर होने की बात कही जा रही है। एचएसबीसी की हालिया रिपोर्ट में तो भारतीय अर्थव्यवस्था के पांच से दस वर्षों में 70 खरब डॉलर होने की बात कही गई है।