सभी प्रत्याशियों के नामांकन के बाद बुधनी में हलचल तेज हो गई है। यहां के मतदाता अपना नया विधायक चुनने के लिए 13 नवंबर को मतदान करेंगे। यह उपचुनाव होने जा रहा है। बुधनी विधानसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद यह तीसरा उपचुनाव होगा। इससे पहले यहां पहली बार 1992 में और दूसरी बार 2006 में उपचुनाव हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों उपचुनावों की वजह केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ही रहे हैं।

1990 में जैसे ही शिवराज सिंह चौहान सांसद बने, उन्होंने यह विधानसभा सीट छोड़ दी। बुधनी विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। अगले वर्ष 1991 के संसदीय चुनाव में अटल बिहारी वाजपेई ने लखनऊ के साथ-साथ विदिशा लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ा। चुनाव में दोनों सीटें वाजपेयी ने जीतीं। बाद में उन्होंने विदिशा सीट से इस्तीफा दे दिया।

जब लोकसभा के लिए उपचुनाव हुआ तो बुधनी से तत्कालीन विधायक शिवराज सिंह चौहान को विदिशा से उम्मीदवार बनाया गया। वे जीतकर संसद पहुंचे।

जिसके चलते उन्हें बुधनी सीट से इस्तीफा देना पड़ा। इसके कारण 1992 में पहली बार उपचुनाव की आवश्यकता पड़ी। बीजेपी ने मोहन लाल शिशिर और कांग्रेस ने राजकुमार पटेल को मैदान में उतारा। मोहन लाल शिशिर चुनाव जीत गये।

29 नवंबर 2005 को बीजेपी नेतृत्व ने शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद तत्कालीन बुधनी विधायक राजेंद्र सिंह राजपूत ने इस्तीफा दे दिया। शिवराज को विधायक बनाने के लिए 2006 में बुधनी विधानसभा में दूसरा उपचुनाव हुआ। अब 2024 में फिर से उपचुनाव हो रहे हैं।