भोपाल. कोरोना के चलते प्रदेश सरकार आर्थिक संक्रमण काल से गुजर रहा है. ऐसी स्थिति में आर्थिक सेहत सुधारने के लिए करोड़ों रुपए की आवश्यकता महसूस की जा रही है. इसके बाद भी नौकरशाही के उदासीन रवैया से राज्य को करोड़ों राजस्व हानि हो रही है. भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने राजस्व विभाग की पोल पट्टी खोलते हुए कहा है कि भूमि दर और लैंड डायवर्शन शुल्क के गलत निर्धारण के कारण 4 करोड़ 85 लाख रुपए की राजस्व हानि हुई है.

बीते विधानसभा सत्र के पटल पर रखी गई कैग की रिपोर्ट के अनुसार भोपाल, दमोह, गुना, मंदसौर, मुरैना, पन्ना, रतलाम और श्योपुर जिलों के 22 प्रकरणों की नमूना जांच में यह तथ्य उभरकर आया कि भूमि के कलेक्ट्रेट रेट और  भूमि डायवर्सन शुल्क की गलत निर्धारण किया गया. यानी 8 जिलों के कलेक्टरों ने 28 सितंबर 2018 पुजारी शासन की अधिसूचना के मुताबिक सहित दरों को लागू नहीं किया गया. इसी प्रकार अलीराजपुर, मंडला, मंदसौर, पन्ना, शहडोल और श्योपुर के तत्कालीन कलेक्टर ने पंचायत उपकर आरोपित नहीं किया गया था. इसके परिणाम स्वरूप उपकर राशि रिपोर्ट 2.72 लाख रूपये का काम आरोपण हुआ. इसके अतिरिक्त 45 में से 16 प्रकरणों में भू-भाटक और प्रीमियम राशि कभी 3.77 लाख रुपए का कम आरोपण किया गया.

भूमि का उच्च दर पर निर्धारण नहीं
बाजार मूल्य दिशा निर्देश 2015 के उपबंध की कंडिका चार के अनुसार  भोपाल इंदौर ग्वालियर और जबलपुर नगर निगम सीमा क्षेत्र के अलावा अन्य शहरों के नगर निगम और नगर पालिका की सीमा में भूमि का निर्धारण क्रमशः 1000 वर्ग मीटर 500 वर्ग मीटर और 300 वर्ग मीटर के लिए उच्च दरों का निर्धारण किया जाना था. कैग द्वारा की गई लेखा परीक्षण में 436 प्रकरणों में आगर मालवा, अलीराजपुर, छतरपुर, दमोह, देवास, गुना, ग्वालियर, इंदौर, कटनी, खरगोन, मंडला, मंदसौर, मुरैना, पन्ना, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, सीहोर, शहडोल, श्योपुर, उज्जैन, उमरिया और विदिशा जिले के एसडीओ ने संपूर्ण भूमि का निर्धारण केवल कृषि भूमि के लिए लागू दरों के आधार पर किया. इसके परिणाम स्वरूप दो करोड़ 58  लाख रुपए की राजस्व हानि हुई है. इसी प्रकार उपबंध की कंडिका एक के अनुसार सड़क के किनारे की भूमि को बाजार मूल्य से 100% 50% और 20% अधिक निर्धारित किया जाना चाहिए था. लेकिन 24 प्रकरणों में यह पाया गया कि उच्च दरें लागू नहीं की गई इसके कारण राज सरकार को राजस्व कम प्राप्त हुआ.

डायवर्सन शुल्क के लिए बिना ही आदेश किए जारी
गुना सागर सतना और विदिशा जिले में वर्ष 2014 से मार्च 2019 की अवधि के दौरान 7668 प्रकरणों में डायवर्सन आदेश जारी किए गए. कैग ने अपने पड़ताल में पाया कि 1255 प्रकरणों में से 113 प्रकरणों में भूमि के उपयोग डायवर्सन आदेश भू घटक और पंचायत उपकर वसूल किए बिना ही आदेश जारी कर दिए गए. यानी गुना सागर सतना और विदिशा कलेक्ट्रेट में एक करोड़ 99 लाख रुपए की वसूली अभी भी लंबित है. राजस्व विभाग ने कैग को बताया कि तहसीलदारों को बकाया राजस्व वसूलने के निर्देश जारी किए गए हैं.