यूक्रेन में जंग में फंसे भारतीयों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। चीफ जस्टिस एनवी रमना ने मामले में अटॉर्नी जनरल को तलब किया है। कोर्ट में CJI ने याचिकाकर्ता से पूछा कि कोर्ट इस मामले में क्या कर सकता है। हालांकि, बाद में CJI ने कहा कि यह एक जरूरी मुद्दा था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से रोमानियाई सीमा पर फंसे छात्रों को निकालने के लिए जल्द कदम उठाने की बात कही।

यूक्रेन में फंसे छात्रों के परिवारों ने किया आवेदन :

याचिका में कहा गया है कि यूक्रेन के मोल्दोवा/रोमानिया सीमा पर करीब 250 छात्र फंसे हुए हैं। बताया जाता है कि पिछले छह दिनों में भारत से कोई फ्लाइट नहीं आई है। यूक्रेन में फंसे छात्रों के परिजनों ने याचिका दायर की है। फंसे छात्रों के परिजनों की ओर से एडवोकेट एएम डेयर ने याचिका दायर की थी। CJI ने कहा कि मामले की सुनवाई की जरूरत है क्योंकि वकील कश्मीर से आए थे।

क्या कोर्ट पुतिन से लड़ाई बंद करने को कह सकता है ?

याचिकाकर्ता के वकीलों ने कहा कि वहां तापमान माइनस 7 है। अदालत को भारतीय विदेश मंत्रालय को वहां फंसे लोगों को राहत मुहैया कराने का निर्देश देना चाहिए। CJI ने कहा कि हम इस बारे में क्या कर सकते हैं ? कल तुम पुतिन से युद्ध रुकवाने की बात करोगें। सीजीआई ने पूछा कि क्या हम पुतिन से युद्ध रोकने के लिए कह सकते हैं। हमें छात्रों के प्रति पूरी सहानुभूति और चिंता है। भारत सरकार अपना काम कर रही है।

दोनों देशों के राष्ट्रपतियों से हुई पीएम मोदी की बात !

जल्द सुनवाई के अनुरोध पर सीजेआई जस्टिस एनवी रमना ने कहा, "हमने अटॉर्नी जनरल को समन भेजा है। जब अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल अदालत में पेश हुए, तो उन्होंने कहा कि वह इसपर जल्द ही कुछ करेंगे।" उन्होंने कहा कि फंसे हुए छात्रों के मुद्दे पर पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की दोनों से बात की थी।

250 छात्र फंसे :

सुनवाई के दौरान एडवोकेट डेयर ने कहा कि फंसे हुए छात्र ओडेसा के नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र हैं। कहा गया कि ये करीब 250 छात्र हैं जो यूक्रेन में सीमा पार नहीं कर पा रहे हैं। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि भारत सरकार ने फंसे छात्रों की मदद के लिए चार मंत्रियों को भी भेजा है। उनमें से एक रोमानिया गया हुआ है। उन्होंने पूछा कि वे यूक्रेन में सीमा पार क्यों नहीं कर सके। इसकी क्रॉस-चेकिंग की जाएगी क्योंकि यूक्रेन का कहना है कि वह सभी को जाने की अनुमति दे रहा है।