देश में आसमान छुटे पेट्रोल डीजल के दाम और VAT को लेकर सियासी घमासान जारी है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा कि, सभी ईंधन करों का 68% केंद्र द्वारा लिया जाता है। फिर भी, पीएम जिम्मेदारी से बचते हैं।
जिम्मेदारी से बचते हैं पीएम-
राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, मोदी जी ईंधन की ऊंची कीमत के लिए राज्यों को जिम्मेदार ठहराते हैं। कोयले की कमी के लिए राज्यों को दोष देते है। ऑक्सीजन की कमी के लिए राज्यों को जिम्मेदार ठहराते है। केंद्र सरकार हर तरह के ईंधन पर 68 फीसदी टैक्स लगाती है। फिर भी पीएम जिम्मेदारी से बचते हैं। मोदी का संघवाद सहकारी नहीं, जबरदस्ती है।
High Fuel prices - blame states
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 28, 2022
Coal shortage - blame states
Oxygen shortage - blame states
68% of all fuel taxes are taken by the centre. Yet, the PM abdicates responsibility.
Modi’s Federalism is not cooperative. It’s coercive.
पीएम का बयान तथ्यों पर आधारित नहीं-
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कम कीमतों के बावजूद, बीजेपी ईंधन पर कर बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों पर हमला कर रही है। राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के बयान तथ्यों पर आधारित नहीं थे। उन्होंने मांग की कि मोदी सरकार पहले केंद्रीय उत्पाद शुल्क का हिसाब दे, जिससे केंद्र ने पिछले आठ साल में 27 लाख करोड़ रुपये की कमाई की है।
राज्यों के साथ हो रहा अन्याय-
राहुल ने आगे कहा कि पेट्रोल और डीजल पर 68 फीसदी टैक्स केंद्र सरकार के पास जाता है। सिर्फ़ 32 प्रतिशत राज्य सरकारों के पास आता है। ऐसे में राज्य सरकारों से उम्मीद करना जो पहले से ही जीएसटी के अपने हिस्से से वंचित हैं, मुझे लगता है कि यह अनुचित है।
पीएम ने की टैक्स कटौती की बात-
बता दें कि कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल मीटिंग की थी। इस बीच, उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति ने आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बोझ को कम करने के लिए पिछले साल नवंबर में उत्पाद शुल्क में कमी की थी। इस बीच राज्यों से भी अपने करों को कम करने का आग्रह किया गया।