भारत ने गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में तुरंत अधिसूचना जारी की है। स्थानीय कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
भारत विश्व में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। केंद्र ने कहा है कि इस आदेश से पहले जारी किए जा चुके पत्र के तहत ही गेहूं के निर्यात की अनुमति दी जाएगी। फरवरी के अंत में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद काला सागर क्षेत्र से निर्यात में गिरावट के कारण वैश्विक खरीदारों ने गेहूं की आपूर्ति के लिए भारत का रुख किया।
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, देश की समस्त खाद्य सुरक्षा का प्रबंधन करने और पड़ोसी और अन्य संवेदनशील देशों की जरूरतों को पूरा करने के लिए, केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।
To manage the overall food security of the country and to support the needs of the neighbouring and other vulnerable countries, the Central Government bans wheat exports with immediate effect. (1/2) pic.twitter.com/dB4tAViLNk
— ANI (@ANI) May 14, 2022
अन्य देशों को निर्यात की अनुमति, भारत सरकार द्वारा अपनी खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद अनुमति के आधार पर और सरकार के अनुरोध पर दी जाएगी। भारत सरकार पड़ोसी और अन्य संवेदनशील विकासशील देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो वैश्विक गेहूं बाजार में अचानक बदलाव के कारण प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुए हैं और गेहूं की पर्याप्त आपूर्ति प्राप्त करने में असमर्थ हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण गेहूं की अंतरराष्ट्रीय कीमत में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे भारत से गेहूं का निर्यात बढ़ा है। मांग बढ़ने से स्थानीय स्तर पर गेहूं और आटे की कीमतों में तेज उछाल आया है।
एक अलग अधिसूचना में, विदेश व्यापार महानिदेशालय ने प्याज के बीज के लिए निर्यात शर्तों को आसान बनाने की घोषणा की है। देश भर में खाद्य पदार्थों की कीमतें लंबे समय से तेजी से बढ़ रही है, जिससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। आटे की कीमत में पिछले साल की तुलना में इस साल करीब 13 फीसदी का इजाफा हुआ है।
सरकार ने कहा है कि गेहूं की वैश्विक कीमतों में अचानक वृद्धि से भारत के कई पड़ोसी और अन्य असुरक्षित देशों में खाद्य सुरक्षा का खतरा पैदा हो सकता है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने गेहूं की अंतरराष्ट्रीय कीमत में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि की है।
आपकों बता दे कि सरकारी आकड़ो के अनुसार, गेहूं खरीदने का न्यूनतम आधार मूल्य 2,015 रुपये प्रति क्विंटल है। लेकिन खुले बाजार में अचानक रेट बढ़ने से गेहूं और आटे पर अप्रैल में महंगाई बढ़कर 9.59 प्रतिशत हो गई, जो मार्च में 7.77 प्रतिशत थी। इस साल गेहूं की सरकारी खरीद में करीब 55 फीसदी की गिरावट आई है क्योंकि खुले बाजार में गेहूं की कीमत एमएसपी (MSP) से ज्यादा है।