भोपाल, 

एमपी स्टेट कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन 'एमपीसीडीएफ' में हुए भर्ती घोटाले की जांच केंद्र व राज्य सरकार ने नए सिरे से शुरू कर दी है। केंद्र का केंद्रीय कार्मिक विभाग महिला आईएएस अरुणा गुप्ता के खिलाफ जांच कर रहा है तो वहीं राज्य सरकार की ओर से एमपी नगर पुलिस भोपाल दुग्ध संघ सीईओ रवींद्र प्रताप सिंह के खिलाफ जांच कर रहा है। एक भर्ती में तीन तरह के घोटाले की बात सामने आ रही है। जैसे व्यापम द्वारा ली गई चयन परीक्षा की मैरिट सूची की अवधि खत्म होने के बाद भर्ती करना, मैरिट सूची में पात्रता रखने वालों की जगह अपने लोगों को पद देना, भर्ती करने के लिए एमपीसीडीएफ के भर्ती नियम के तहत चयन समिति बनाने की जगह चेहतों को चयन समिति में शामिल कर भर्ती में अपने लोगों को तवज्जो देना है। इनमें से दो आरोप भी साबित भी हो चुके हैं। सूची की वैधता अवधि खत्म होने के बाद की गई पंकज पांडेय की भर्ती को एमपीसीडीएफ ने ही अवैध करार दे दिया है और पंकज पांडे को बर्खास्त कर दिया है तो चयन समिति नियम के अनुरूप न बनाकर अपने लोगों को  शामिल करने के मामले में सीईओ रवींद्र प्रताप सिंह को पहले ही शोकाज नोटिस जारी हो चुके हैं।

इनकी जांच क्यों..!

आईएएस अरुणा गुप्ता:- यह भर्ती 2016 से 2018 के बीच हुई थी। नियोक्ता एमपीसीडीएफ था। जिसकी एमडी उस समय अरुणा गुप्ता थी। विशेषज्ञों के मुताबिक वह चाहती तो भर्ती में हुई गड़बड़ी को रोक सकती थी।

सीईओ रवींद्र प्रताप सिंह: अरुणा गुप्ता के रहते रवींद्र प्रताप सिंह एमपीसीडीएफ में महाप्रबंधक प्रशासन के पद पर कार्यरत थे। भर्ती की पूरी कार्रवाई

इधर बयान देने नहीं पहुंचे सीईओ:- एमपी नगर पुलिस द्वारा की जा रही जांच के तहत गुरुवार को सीईओ रवींद्र प्रताप सिंह तिवारी को बयान के लिए बुलाया गया था पुलिस के मुताबिक वह बयान देने नहीं पहुंचे थे। वहीं एमपीसीडीएफ की उच्च श्रेणी लिपिक जयश्री गणेशन ने बयान दर्ज कराए हैं।

एमपीसीडीएफ और एसीएस में टकराव, दर्ज नहीं प्रकरण..!

जेएन कंसोटिया मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करवाने की बजाए कुछ अधिकारियों को संरक्षण देते नजर आ रहे हैं। जैसे कि भर्ती घोटाला मामले में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के दखल के बाद सीईओ रवींद्र प्रताप सिंह को वर्तमान एमडी संजय गुप्ता ने निलंबित किया था। एसीएस ने उक्त निलंबन को निरस्त कर दिया है। जवाब में एक जांच दल बनाया है लेकिन उसमें उन अधिकारियों को शामिल किया है जो उसी भर्ती से होकर आएं है जिस भर्ती में घोटाला साबित हो चुका है। भर्ती घोटाला दो वर्ष पूर्व संज्ञान में आया लेकिन शासन ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। धीरे-धीरे साक्ष्य मिटाए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो भर्ती से जुड़े कई दस्तावेज छिन्न-भिन्न किए जा चुके हैं। जिस कांग्रेस सरकार के समय एमपीसीडीएफ व दुग्ध संघों की नींव रखी गई थी वही कांग्रेस विपक्ष में है लेकिन विपक्ष को घोटाले की भनक तक नहीं है। फायदा घोटाला करने वालों को मिल रहा है।

जांच बीच में अटकने की वजह..!

विशेषज्ञों के मुताबिक पंकज पांडेय को बर्खास्त किया जा चुका है यानी भर्ती घोटाला साबित हो चुका है। इसमें मामले में सबसे पहले एमपीसीडीएफ को अपनी ओर से पुलिस में आपराधिक प्रकरण दर्ज इन्हीं के द्वारा ही सम्पन्न कराई गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में अब तक अधिकृत रूप से आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया जाना था, जो कि नहीं कराया जा रहा है इसका आशय है कि मामले में कई अधिकारी मिले हो सकते हैं जो एक-दूसरे को बचा रहे हैं। उधर 

लोकायुक्त समेत अन्य स्तरों पर शिकायत की जा चुकी है लेकिन तथ्यहीन दस्तावेज व जानकारियां देकर बंद कराया जा रहा है। एजेंसी की जांच निष्कर्ष पर नहीं पहुंची। विशेषज्ञों की मानें तो एमपीसीडीएफ से जब तक आपराधिक प्रकरण दर्ज करने व विस्तृत जांच करने की मांग नहीं की जाती, तब तक मामला अटकना तय है।