भोपाल: भारत सरकार के केंद्रीय जल आयोग ने प्रदेश के दो और बड़े बांधों हरसी एवं हलाली को अपनी निगरानी में ले लिया है। ग्वालियर का हरसी बांध आजादी से भी पुराना है।

डबरा-भितरवार के 200 और मुरार के 40 गांवों की कृषि भूमि की सिंचाई और पेयजल का सहारा यह बांध अपने जमाने में एशिया के सबसे बड़े मिट्टी बांध में शामिल रहा है, जो ग्वालियर स्टेट की समृद्धि का सबसे बड़ा प्रतीक था।

तब बांध के निर्माण में 78 लाख रुपए खर्च का अनुमान लगाया गया था। उस दौर में इतनी रकम काफी थी। तत्कालीन महाराजा जीवाजी राव सिंधिया ने 1911 में पार्वती नदी पर बांध का निर्माण शुरू कराया और 1935 में यह पूरी तरह बनकर तैयार हुआ।

वर्तमान में यह बांध लगभग 65 हजार हैक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई के लिए पानी देता है। इसी प्रकार, हलाली बांध जिसे सम्राट अशोक सागर बांध भी कहा जाता है, विदिशा एवं रायसेन के टेरेटरी में आता है तथा इसका निर्माण वर्ष 1973 में हुआ था।

राज्य के जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीयिर चम्बल बेतवा भोपाल तथा चीफ इंजीनियर यमुना बेसिन ग्वालियर से कहा गया है कि वे इन बांधों के जलस्तर का दस साल का डाटा उपलब्ध करायें।