भोपाल. अश्लील हरकतें और महिला के लैंगिक उत्पीड़न के मामले में निलंबित अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मोहन मीणा बहाली की कवायद शुरू हो गई है. यह पहल केंद्र सरकार के एक पत्र आने के बाद प्रारंभ की गई है. केंद्रीय कार्मिक विभाग में मीणा के निलंबन अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं. कार्मिक विभाग ने कहा है कि निलंबन अवधि बढ़ाने से पहले केंद्र से अनुमति नहीं ली गई. जबकि अखिल भारतीय सेवा के अफसरों के लिए नियम यह है कि राज्य शासन निलंबित कर सकती है, लेकिन निलंबन की सूचना समय अवधि पर केंद्र को देना होता है. इस नियम का पालन नहीं किया गया.
यहां यह उल्लेखनीय है कि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं तत्कालीन पदेन वन संरक्षक बैतूल मोहन मीणा को पुत्र के बैंक अकाउंट में ₹30,000 डिपॉजिट कराने के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है. इसके अलावा अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक बिंदु शर्मा की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने मोहन मीणा को अश्लील हरकतें, अनुचित आचरण और कार्यस्थल पर महिलाओं लैंगिक उत्पीड़न के लिए भी प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया है. इसके कारण राज्य शासन ने 19 अगस्त को निलंबन का आदेश कर दिया. अखिल भारतीय सेवा नियम के अनुसार निलंबित अधिकारी को 30 दिन के भीतर चार्जशीट जारी करने का प्रावधान है. निलंबित आईएफएस अधिकारी मीणा ने 20 अक्टूबर 21 को पीसीसीएफ मुख्यालय को आवेदन देकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की. तब तक मीणा को यह पता नहीं था कि राज्य शासन ने उनकी चार्जशीट 18 अक्टूबर को ही जारी कर दी है. यह बात अलग है कि समय पर मुख्यालय ने राज्य शासन के आदेश की तामील ही नहीं कराई है.
सीएम हेल्पलाइन में भी लगाई थी बहाली की गुहार
निलंबित आइएफएस अधिकारी मोहन मीणा ने सीएम हेल्पलाइन में भी आवेदन कर अपनी बहाली की गुहार लगाई थी. सीएम हेल्पलाइन में तर्क दिया था कि वन विभाग ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है. जबकि वन विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मोहन मीणा के निलंबन को लेकर विद्युत प्रक्रिया का पालन किया गया था. इसके अलावा मोहन मीणा ने निलंबन को लेकर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) मैं भी चुनौती दी है.
वन्य प्राणी शाखा अभी तक जारी नहीं कर सका आरोप पत्र
निलंबित चल रहा है अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मोहन मीणा के खिलाफ सालभर वन्य प्राणी शाखा में आरोप पत्र प्रशासन एक शाखा में लंबित है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिंह परियोजना में पदस्थी के दौरान नियम विरुद्ध राजसात वाहनों को छोड़ने, वन्य प्राणी शिकार के आरोपियों की हिमायत करने और टूर डायरी में छेड़छाड़ करने का आरोप है. इस मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक जेएस चौहान ने जांच कर उनके खिलाफ आरोप पत्र बनाकर पीसीसीएफ वन्य प्राणी को सौंप दिया था.
मीणा को लेकर वन मंत्री और पीएस आमने-सामने
जंगल महकमे में आईएफएस मोहन मीणा वन मंत्री विजय शाह के 'ब्लू आई' माने जाते हैं. यही कारण रहा कि लंबे समय तक विजय शाह उन्हें बचाते आ रहे थे. दो-दो कमेटियों द्वारा उन्हें कसूरवार ठहराने के बाद ही प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल उन्हें निलंबित कर सकें. बहाली के लिए भी वन मंत्री विजय शाह प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल पर दबाव बना रहे हैं