भोपाल: पुलिस मुख्यालय में स्थित सीआईडी विंग के एडीजीपी जीपी सिंह ने अवैध हथियार रखने वालों को सजा दिलाने का प्रतिशत बढ़ाने के लिये सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को नई एसओपी-मानक प्रचलित प्रक्रिया जारी की है।

एडीजीपी ने जारी एसओपी में कहा है कि वर्तमान परिवेश में अपराधियों द्वारा अवैध अस्त्राशस्त्रों का विभिन्न आपराधिक घटनाओं में उपयोग कर गंभीर/जघन्य अपराध किये जाते हैं। यदि प्राथमिक अवस्था में ही अपराधियों से अवैध अस्त्राशस्त्र विशेषकर आग्नेय शस्त्र की जप्ती के पश्चात उन पर आम्र्स एक्ट 1959 के तहत पंजीबद्ध अपराधों की सही प्रक्रियात्मक विवेचना करके अस्त्राशस्त्र/आग्नेय शस्त्र के मूल स्त्रोत तक पहुंचकर संगठित अवैध अस्त्राशस्त्र निर्माताओं/संधारकों के विरुद्ध सशक्त अभियोजन पक्ष न्यायालय में प्रस्तुत किया जाये, तब ऐसे प्रकरणों में सजायाबी का प्रतिशत बढऩे से, अवैध अस्त्राशस्त्रों का निर्माण कर विक्रय करने वाले एवं इनका क्रय कर अपराध में दुरुपयोग करने वाले अपराधियों में कानून के प्रति भय उत्पन्न होगा, जिससे ऐसे अवैध अस्त्र/शस्त्रों के दुरपयोग से गंभीर/जघन्य अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।

एडीजीपी ने आगे कहा है कि यदि प्रदेश स्तर पर आम्र्स एक्ट से संबंधित अपराधों में सजायाबी के प्रतिशत का विश्लेषण करें तो यह प्रकट होता है कि विवेचना के दौरान विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं एवं न्यायालयीन ट्रायलों का उचित अनुसरण नहीं होने से ऐसे आपराधिक प्रकरणों में आरोपी न्यायालय से दोष मुक्त हो जाते हैं। इसलिये आम्र्स एक्ट से संबंधित विभिन्न आपराधिक प्रकरणों में 26 बिन्दुओं वाली नई एसओपी का पालन करायें, जिससे प्रदेश में ऐसे अपराधों में संलिप्त अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा न्यायालयों से करायी जा सकें। एसओपी में यह बिन्दु भी दिया गया है कि आम्र्स एक्ट के अपराधियों का विस्तृत ब्यौरा एवं पूछताछ रिपोर्ट, भविष्य में उपयोग हेतु सीआईडी को भी भेजी जाये।