भोपाल: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ड्रीम सपना है कि वन विहार को सिंगापुर जूँ की तर्ज पर विकसित किया जाए. वरिष्ठ अफसरों के बीच मतांतर के चलते 18 महीने का समय बीत गया किंतु वन विहार सिंगापुर जूँ की तर्ज पर आकार नहीं ले पा रहा है. इस बीच इको पर्यटन बोर्ड के दो सीईओ और वन विहार के 2 डायरेक्टर बदल गए.

अभी भी सिंगापुर जूँ की तर्ज वन विहार को विकसित करने की ड्राइंग-डिजाइन फाइनल नहीं हो सकी है. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इको पर्यटन बोर्ड से सत्यानंद को इसलिए हटाया गया, क्योंकि वे मुख्यमंत्री के सपने को साकार करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं ले रहे थे. अब 4 अगस्त को प्रस्तावित बैठक में वन विहार के रिनोवेशन संबंधित निर्णय लिया जाएगा.

जनवरी 2021 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों को एक बैठक में वन विहार को सिंगापुर जूँ की तरह विकसित करने के निर्देश दिए थे. मुख्यमंत्री चौहान ने जब घोषणा की थी, तब ईको पर्यटन बोर्ड के सीईओ एसएस राजपूत थे. राजपूत ने 5 करोड़ लागत से वन विहार को सिंगापुर जूँ की तरह विकसित करने के लिए इंदौर की आकृति आर्किटेक्ट से ड्राइंग-डिजाइन बनवाया.

उसे तत्कालीन उप समिति के सदस्य तत्कालीन पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ आलोक कुमार, तत्कालीन एपीसीसीएफ जेएस चौहान और तत्कालीन वन विहार की संचालक कोमोलिका मोहंता से स्वीकृत कराया. दिलचस्प पहलू यह रहा कि टेंडर होता इसके पहले एसएस राजपूत सेवानिवृत्त हो गए. उनके स्थान पर सत्यानंद इको टूरिज्म बोर्ड के नए सीईओ बने. सत्यानंद पूर्व सीईओ राजपूत की ड्राइंग डिजाइन से सहमत नहीं थे.

सब कमेटी द्वारा स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन में तमाम सारी खामियां निकालते हुए सत्यानंद अपने हिसाब से संशोधनों का सिलसिला शुरू किया. सत्यानंद ने इतना जरूर किया कि वन विहार के सिंगापुर जू की तर्ज पर विकसित करने के लिए तैयार डिजाइन में संशोधन कर उसकी लागत एक करोड़ कम कर दी. वे भी वन विहार के विकसित करने की डिजाइन फाइनल स्टेज तक पहुंचा पाते, उनको भी इको पर्यटन बोर्ड से स्थानांतरित कर दिया गया.

अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की मंशा के अनुरूप वन विहार को सिंगापुर जूँ के स्वरूप देने की जिम्मेदारी बोर्ड की वर्तमान सीईओ सामिता राजौरा को सौपी गई है. इस मुद्दे पर 4 अगस्त को महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है. इस बैठक में टेंडर की शर्तें और अन्य मुद्दों पर निर्णय किए जाने की संभावना है.

सीजेडए की आपत्तियों के बाद मुख्य द्वार में बदलाव-

वन विहार के मुख्य द्वार को भव्यता प्रदान करने के लिए पूर्व में तय की डिजाइन में अब बदलाव करना पड़ गया है. मुख्य द्वार का चौड़ीकरण होगा किंतु उसके स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा. यह निर्णय केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) की आपत्ति के बाद लिया गया है. बताते हैं कि अब वन विहार का मुख्य द्वार भीमबेटका की स्टाइल पर विकसित किया जाएगा.

इसके अलावा एक बदलाव स्काईवॉक के स्थान को लेकर भी किया गया है. पूर्व में स्काईवॉक मुख्य द्वार के पास बना था, जो कि अब भालू एंक्लोजर के सामने बनाया जाना प्रस्तावित है. अब स्काईवॉक की साइज भी बढ़ाई गई है. ग्लास से बनने वाले स्काई वाक बनाने की लागत अब ढाई करोड़ रुपए अनुमानित है. इसके लिए अलग से टेंडर बुलाए जाने का निर्णय किया जा रहा है. टेंडर में अपनों को उपकृत करने के लिए अधिकारियों में अभी भी शह-मात का खेल चल रहा है.