Bhopal: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत Vocal for Local का अनुशरण करते हुए भारत पर लंबे समय तक शासन करने वाले अंग्रेजों को भी आज गमछा पहना दिया। अपनी रहन सहन की शैली के प्रति हमेशा सजग रहने वाले और लकदक दिखने वाले ब्रिटिश हाई कमिश्नर एलेक्स एलिस (Alex W Ellis) और डिप्टी हाई कमिश्नर एलेन गेमेल( Alan Gemmell)ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान(CM Shivraj Singh Chauhan)से भेंट की। मुख्यमंत्री चौहान ने एलेक्स एलिस और एलेन गेमेल को फैशन स्टेटमेंट बन चुका चंदेरी का प्रसिद्ध गमछा पहना कर स्वागत किया।
मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश में होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट, यूनाइटेड किंगडम और मध्यप्रदेश के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री चौहान ने पर्यटन सहित पर्यावरण-संरक्षण, प्राकृतिक कृषि, ग्लोबल वार्मिंग के लिए प्रदेश में जारी गतिविधियों की भी जानकारी दी। अतिथिद्वय ने चंदेरी गमछे के बारे में जानना चाहा तो चौहान ने उन्हें चंदेरी के गमछे और वहां की प्रसिद्ध साड़ियों के बारे में भी बताया।फटी चीथड़ेदार जींस पहनने व पीजा खाने वाली युवा पीढ़ी शायद भारतीय गमछे के बारे में न जानती हो।
उनकी जानकारी के लिए गमछा एक परम्परागत पतला (thin), अपरिष्कृत (coarse), सूती तौलिया (Cotton towel) जैसा वस्त्र होता है। अभी भी पारंपरिक भारतीय विवाह समारोह में परिवार के बुजुर्गों के दिए जाने वाले पांच वस्त्रों में गमछा आवश्यक होता है। अमूमन छोटे 'चेक' जैसा डिजाइन ज्यादा पसंद किया जाता है। भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, और अन्य दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के गाँवों के लोग इसका विविध प्रकार से उपयोग करते हैं। इस क्षेत्र की जलवायु के मद्देनजर यह गमछा जरूरत की चीज बन चुका है।
इसका उपयोग शरीर को पोंछने, सिर पर बांधने, कमर में बांधने, कमर के नीचे पहनने, पसीना पोंछने, कंधे पर रखने और विविध संस्करों में होता है। एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में इसका रूप कुछ बदलता भी है। गाँव के मर्द लोग इसे 'धोती' की तरह भी पहन लेते हैं। बनारस में गमछा पहने लोगों के सड़क पर भी देखा जा सकता है। गमछे का USP यह है कि इसे आसानी से धोया व सुखाया जा सकता है और वहुपयोगी होता है।
कोरोना महामारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेहरा ढकने के लिए मास्क उपलब्ध नहीं होने पर बनारसी गमछे को विकल्प बताया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह से उत्साहित सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. उत्तम ओझा ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बनारसी गमछा भेजा था। स्पीड पोस्ट से भेजे गमछे के साथ ओझा ने ट्रंप को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि वह इस गमछे का प्रयोग करें। डॉ. उत्तम ओझा की सोच थी कि इससे बनारसी गमछे को विश्वव्यापी मान्यता मिलेगी। मोदी के आह्वान के बाद कई कार्यकर्ताओं ने ट्रंप को गमछे भिजवाए थे। प्रधानमंत्री मोदी भी वाराणसी में होने वाले रोड शो में बनारसी गमछा पहनना नहीं मिस करते हैं।
चंदेरी साड़ियाँ-
चंदेरी का गमछा तो वहां का Byproduct है, पर चंदेरी अपनी बुन्देलखण्डी शैली में बनी हस्तनिर्मित साड़ियों के लिये काफी मशहूर है। चंदेरी साड़ियों से प्रभावित होकर अनेक बॉलीवुड कलाकार भी चंदेरी साड़ियां खरीदने आ चुके हैं। इसी साड़ी को केन्द्र में रखकर अनुष्का शर्मा और वरुण धवन की फिल्म "सुई-धागा' भी आई थी।
महाभारत से है संबंध-
मालवा और बुंदेलखंड की सीमाओं से लगा हुआ चंदेरी हरे भरे जंगलों और सुन्दर झीलों से घिरा हुआ है तथा विंध्य की पहाड़ियों पर स्थित है। इस ऐतिहासिक नगर का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। 11वीं शताब्दी में यह नगर एक महत्त्वपूर्ण सैनिक केंद्र था और प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी यहीं से होकर गुजरते थे। कहा जाता है कि चंदेरी फैब्रिक की खोज शिशुपाल (भगवान श्रीकृष्ण की बुआ के बेटे) ने की थी।
दूसरी शताब्दी से चर्चित-
बनारसी,सिल्क और चिकन की साड़ियों की तरह चंदेरी साड़ियां भी अपनी अनूठी प्रिंट और डिजाइन के चलते लोगों के बीच खासा प्रसिद्ध हैं। कहा जाता है कि दूसरी शताब्दी से ही चंदेरी बुनकरों का केंद्र रहा है। विंध्यांचल का यह इलाका बुनकरी के लिए तब से ही जाना जाता रहा है। 9वीं और 10वीं शताब्दी में बने जैन मंदिर यहां के मुख्य आकर्षण हैं, जिन्हें देखने हर साल बड़ी संख्या में जैन धर्म के अनुयायी आते हैं।
धीरे-धीरे समय के साथ-साथ चंदेरी GI Indicator भी मिल चुका-
फैब्रिक से निर्मित चन्देरी साड़ियों के पैटर्न- नलफर्मा, डंडीदार, चटाई, जंगला और मेहंदी वाले हाथ आदि दुनियाभर में अत्यधिक प्रसिद्ध होते गए। चंदेरी फैब्रिक की शुद्धता और इसके रोमांचक इतिहास के कारण यह लोगों में एक मशहूर फैब्रिक के रूप में निखरता गया। भारत सरकार ने चंदेरी फैब्रिक को मध्यप्रदेश के ज्योग्राफिक इंडिकेशन (GI Indicator) के द्वारा संरक्षण प्रदान किया है।