बिजलीघरों को हो सकती है दिक्कत..
भोपाल: कुछ महीने पहले बिजली घरों की सांसे रोक देने पर आमदा नजर आ रहा कोयला संकट फिर पैर पसार सकता है। भीषण गर्मी के बावजूद प्रदेश के कई जिलों के ग्रामीण इलाकों में आठ घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है। हालत यह है कि प्रदेश के चारों थर्मल पावर हाउस में तीन-चार दिन का कोयला शेष बताया जा रहा है। इसके चलते 700 मेगावाट बिजली ओवर ड्रॉ करने की नौबत आ चुकी है।

तोमर ने कहा मप्र में कोयले के परिवहन के लिए रोजाना 12.5 रैंक की जरूरत होती है, जबकि 8.6 रैक ही मिल पा रहे है। इस कारण रोजाना 15600 मीट्रिक टन कोयला कम मिल रहा है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा मध्यप्रदेश में थर्मल पावर हाउस से बिजली उत्पादन क्षमता 4570 मेगावाट है। तय प्रावधान के मुताबिक 26 दिन का कोयला होना जरूरी है। इन 26 दिनों के लिए 40 लाख 5600 मीट्रिक टन कोयला होना जरूरी है।
दूसरी ओर बिजली मामलों के जानकार राजेंद्र अग्रवाल के मुताबिक प्रदेश में सोमवार शाम 7:30 बजे बिजली की डिमांड 10844 मेगावाट थी, जबकि राज्य का उत्पादन 5172 और सेंट्रल सेक्टर से 4964 मेगावाट था| अग्रवाल का कहना है बैंकिंग के तहत अन्य राज्यों को दी जा रही बिजली बंद करके सेंट्रल सेक्टर से आपूर्ति करनी चाहिए।